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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं अधिगम के सिद्धांत' के अंतर्गत 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'आत्मकेन्द्रितता' (Egocentrism) और 'संरक्षण का अभाव' (Lack of Conservation) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मीडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (mPFC) और 'इंसुला' (Insula) के बीच सामाजिक परिप्रेक्ष्य लेने की क्षमता की अपरिपक्वता, दृश्य-स्थानिक विकेंद्रीकरण की विसंगति तथा कार्यकारी नियंत्रण की सक्रियण गतिकी, तथा जॉन फ्लेवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित 'दृश्य परिप्रेक्ष्य ग्रहण' (Visual Perspective-Taking: Level 1 and Level 2) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विकेंद्रीकरण संवर्धन आधारित शिक्षाशास्त्र (Decentration-Focused Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक लचीलेपन, तार्किक विकेंद्रीकरण व समग्र बौद्धिक परिपक्वता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 2 से 7 वर्ष) में बालकों में 'आत्मकेन्द्रितता' (Egocentrism - यह न समझ पाना कि दूसरे का दृष्टिकोण उनके अपने दृष्टिकोण से भिन्न हो सकता है) और 'संरक्षण का अभाव' (Lack of Conservation) प्रमुख विशेषताएँ हैं। न्यूरो-संज्ञानात्मक स्तर पर, यह 'मीडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (mPFC, जो दूसरों के मानसिक राज्यों और दृष्टिकोण को समझने से जुड़ा है) तथा 'इंसुला' के बीच परिपक्वता की कमी और न्यूरोनल नेटवर्क के अपूर्ण एकीकरण के कारण होता है। जॉन फ्लेवेल के 'दृश्य परिप्रेक्ष्य ग्रहण' (Visual Perspective-Taking) के अध्ययन भी यह दर्शाते हैं कि बच्चे प्रारंभिक स्तर पर केवल अपना दृष्टिकोण देख पाते हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में, शिक्षक 'विकेंद्रीकरण-केंद्रित और मल्टीसेंसरी सहयोगात्मक शिक्षाशास्त्र' (Decentration-Focused Pedagogy) का उपयोग करके बच्चों में अन्य के दृष्टिकोण को समझने, संज्ञानात्मक लचीलेपन और तार्किक विकेंद्रीकरण का संवर्धन कर सकते हैं। अतः विकल्प (c) सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की शैलियों और शिक्षण रणनीतियों' के संदर्भ में, डेविड कोब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत चार प्रमुख चरणों—'मूर्त अनुभव' (Concrete Experience), 'परावर्तनीय प्रेक्षण' (Reflective Observation), 'मूर्त अवधारणात्मक रूपरेखा/सार्वभौमिक संकल्पना' (Abstract Conceptualization), और 'सक्रिय प्रयोग' (Active Experimentation)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा इस चक्र से उत्पन्न होने वाली चार अधिगम शैलियों—'अभिसारी' (Converger), 'अपसारी' (Diverger), 'आत्मसातकर्ता' (Assimilator), और 'समायोजक' (Accommodator)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'पर्यावरण अध्ययन' (EVS) के अंतर्गत 'पर्यावरणीय प्रदूषण और उनके प्रभावों' के संदर्भ में, वायुमंडल की विभिन्न परतों (जैसे क्षوبमंडल, समतापमंडल आदि) और उनमें घटित होने वाली प्राकृतिक एवं मानवीय घटनाओं—विशेषकर 'ओजोन परत का क्षरण' (Ozone Layer Depletion)—के प्रमुख कारणों, जिम्मेदार गैसों (जैसे सीएफसी, हेलन आदि) और उनके रासायनिक प्रभावों के तार्किक विश्लेषण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं के वर्गीकरण (Classification), उत्क्रमणीयता (Reversibility) और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता प्राप्त कर लेता है, बशर्ते वे वस्तुएं उसकी प्रत्यक्ष दृष्टि या अनुभव (Concrete) के दायरे में हों।
3. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage, 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetical-Deductive Reasoning) और वैज्ञानिक सोच की क्षमता का विकास होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है - भावर एवं तराई क्षेत्र, गंगा-यमुना का विशाल मैदान, और दक्षिण का पठारी क्षेत्र।
2. राज्य के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत झाँसी, ललितपुर, महोबा, बांदा और सोनभद्र जैसे जिले आते हैं, और यहाँ की मुख्य नदियाँ बेतवा, केन तथा सोन हैं।
3. 'भावर' क्षेत्र महीन कणों वाली उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का मैदान है, जहाँ नदियाँ सतह पर बहती हैं और कृषि के लिए यह क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के त्रि-आयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित मॉडल के अनुसार, जब कोई बालक किसी समस्या के समाधान हेतु अपनी बौद्धिक क्षमताओं का प्रयोग करते हुए दिए गए तथ्यों के आधार पर केवल एक ही पारंपरिक और सबसे सही निष्कर्ष पर पहुँचने का प्रयास करता है, तो गिलफोर्ड के बुद्धि के त्रि-आयामी त्रि-अक्षीय वर्गीकरण (Operations, Contents, Products) के अंतर्गत यह मानसिक प्रक्रिया मुख्य रूप से किस बौद्धिक आयाम (Dimension) से संबंधित है?
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