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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'विकास के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Sociocultural Theory) के अंतर्गत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'स्केफोल्डिंग' (Scaffolding) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डॉर्मोलेटेरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System: विशेष रूप से इन्फीरियर फ्रंटल गाइरस और इन्फीरियर पैरिएटल लोब) और 'लैंग्वेज नेटवर्क' के बीच सामाजिक मध्यस्थता, आंतरिक भाषण (Inner Speech) internalization, और सहयोगात्मक संसंज्ञा (Co-regulation) की सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) द्वारा प्रतिपादित 'स्कैफोल्डिंग और सांस्कृतिक उपकरणों की अवधारणा' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सामाजिक-रचनावादी साक्षरता शिक्षाशास्त्र (Social-Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कार्यों, सांस्कृतिक मध्यस्थता व समग्र मानसिक विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के न्यूरो-संज्ञानात्मक विश्लेषण के अनुसार, समीपस्थ विकास के क्षेत्र (ZPD) में जब कोई अधिक सक्षम साथी (MKO) स्केफोल्डिंग प्रदान करता है, तो मस्तिष्क का 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (जो दूसरों के कार्यों और इरादों को समझने में मदद करता है) और 'डॉर्मोलेटेरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' सक्रिय होते हैं। इसके साथ ही भाषा एक सांस्कृतिक उपकरण के रूप में कार्य करती है, जो बाह्य भाषण से आंतरिक भाषण (Inner Speech) में रूपांतरित होकर कार्यकारी कार्यों और संज्ञानात्मक स्व-नियमन (Self-regulation) को न्यूरोलॉजिकल रूप से मजबूत करती है। अतः विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य कथन है।
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