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Indian Polity
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'अस्पृश्यता का अंत' (Abolition of Untouchability) करता है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है और इसका अभ्यास किसी भी रूप में दंडनीय अपराध है।
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Related Questions

→ भारत में निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनावी सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान की गई है, तथा यह एक अखिल भारतीय संस्था है जो केंद्र और राज्य दोनों के लिए समान रूप से निर्वाचन आयोजित करती है। 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी संस्तुति देते हुए यह सिफारिश की थी कि एक व्यक्ति को दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, और इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधित करके अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारित कर दी गई। 3. निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थायी रूप से वर्ष 1950 से ही कार्य कर रहा है, जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, और इनके निर्णयों में मतभेद होने पर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की कार्यकारी, विधायी और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित और विधानविषयक प्रस्तावों से संबंधित सभी विनिश्चय मंत्रिपरिषद के राष्ट्रपति को संसूचित करे, और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर ऐसी सूचना प्रदान करे। 2. राष्ट्रपति को किसी संसद द्वारा पारित साधारण विधेयक पर अनुमति (Assent) देने, अनुमति रोकने या विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाने की शक्ति प्राप्त है (अनुच्छेद 111), किंतु यदि संसद उस विधेयक को संशोधनों के साथ या बिना संशोधनों के पुनः पारित कर देती है और राष्ट्रपति के पास भेजती है, तो राष्ट्रपति के लिए उस पर अपनी अनुमति देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) हो जाता है। 3. राष्ट्रपति को प्राप्त 'निलंबकारी वीटो' (Suspensive Veto) की शक्ति धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में भी समान रूप से लागू होती है, अर्थात् राष्ट्रपति धन विधेयक को भी संसद के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में 'चार्टर अधिनियम, 1793' (Charter Act of 1793) और 'चार्टर अधिनियम, 1813' (Charter Act of 1813) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चार्टर अधिनियम, 1793 के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को भारत में अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) के सदस्यों और उनके कर्मचारियों का वेतन भारतीय राजस्व (Indian Revenues) से ही दिया जाएगा। 2. चार्टर अधिनियम, 1813 ने भारत में कंपनी के चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर अन्य सभी व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया, तथा पहली बार भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए प्रति वर्ष 1 लाख रुपये की राशि खर्च करने का वैधानिक प्रावधान किया गया। 3. चार्टर अधिनियम, 1813 के द्वारा भारत में ईसाई मिशनरियों को आकर लोगों को प्रबुद्ध करने और धर्म प्रचार करने की अनुमति दी गई, और साथ ही ब्रिटिश नागरिकों तथा कंपनियों के लिए भारत के साथ व्यापार को पूरी तरह से प्रतिबंधित रखा गया जिसमें कोई छूट नहीं दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के भाग XV के अंतर्गत अनुच्छेद 324 से 329 तक निर्वाचन आयोग की स्थापना, शक्तियों और प्रक्रियाओं का प्रावधान किया गया है, तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई विधियों के अधीन की जाती है, और इन सभी को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान कार्यकाल की सुरक्षा (Security of Tenure) प्राप्त है। 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) में वर्ष 1996 के संशोधनों के पश्चात लोकसभा या विधानसभा चुनाव में किसी अभ्यर्थी की मृत्यु होने की स्थिति में चुनाव को स्थगित करने का नियम बनाया गया है, बशर्ते वह मृत अभ्यर्थी किसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्यीय दल (Recognized Political Party) का आधिकारिक उम्मीदवार हो। 3. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी रिपोर्ट में सरकारी धन से वित्तपोषित चुनाव (State Funding of Elections), निर्वाचन आयोग को बहु-सदस्यीय निकाय बनाए रखने, तथा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे संसद में किसी भी स्थिति में मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपनी पदमुक्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए संविधान द्वारा पूर्णतः पात्र (Eligible) घोषित किया गया है, क्योंकि उसका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसकी स्वतंत्रता पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है। 3. अनुच्छेद 149 के तहत CAG संसद द्वारा बनाई गई विधि के अनुसार संघ और राज्यों के लेखाओं के संबंध में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, और CAG की रिपोर्टों की संवीक्षा करने की मुख्य जिम्मेदारी संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) द्वारा निभाई जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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