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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम पठार (Plateaus of Learning)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, ए.डब्ल्यू. गिट्स (A.W. Staats) और आधुनिक न्यूरोसाइंस के 'संज्ञानात्मक थकान और न्यूरो-मेटाबॉलिक डिप्लेशन मॉडल' (Cognitive Fatigue and Neuro-metabolic Depletion Model) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'डॉसोटैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC) और 'बेसल गैन्ग्लिया' (Basal Ganglia) के बीच ऊर्जा चयापचय (ATP depletion), न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटिलकोलाइन और डोपामाइन) की कमी, और कार्यशील स्मृति (Working Memory) ओवरलोड की सक्रियण गतिकी, तथा ब्रायन और हार्ter (Bryan & Harter) द्वारा प्रतिपादित 'अभ्यास वक्र की उत्तर-चरण सीमाबद्धता' (Hierarchical Habit-Formation Plateau) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, ब्रेक-इंटीग्रेटेड मल्टीसेंसरी कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Break-Integrated Multisensory Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक ऊर्जा पुनर्स्थापना, प्रेरणा संवर्धन व समग्र अधिगम दक्षता के पुनरुत्थान में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के बाल विकास और शिक्षण शास्त्र के संदर्भ में, अधिगम के पठार (Plateaus of Learning) वह स्थिति है जहाँ सीखने की गति रुक जाती है। न्यूरोसाइंस के दृष्टिकोण से, जब शिक्षार्थी लंबे समय तक एक ही प्रकार के अभ्यास में संलग्न रहता है, तो मस्तिष्क के 'डॉसोटैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) और 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC) में संज्ञानात्मक थकान, ऊर्जा चयापचय (ATP) की कमी और कार्यशील स्मृति का अतिभार (Overload) हो जाता है। ब्रायन और हार्ter के अनुसार यह पदानुक्रमित आदतों के संयोजन में आने वाली बाधा है। इसे दूर करने के लिए आधुनिक समावेशी कक्षा में मेटाकॉग्निटिव रणनीतियों, विविध शिक्षण विधियों और विश्राम अंतरालों (Spaced Learning/Breaks) का उपयोग किया जाता है। अतः विकल्प (c) सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व मापन' (Personality Assessment) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक हरमन रोर्शच (Hermann Rorschach) द्वारा 1921 में विकसित 'स्याही धब्बा परीक्षण' (Inkblot Test) के अंतर्गत, जब कोई परीक्षार्थी (Subject) किसी कार्ड पर बने स्याही के धब्बे के केवल किसी छोटे और विशिष्ट हिस्से (Detail) का उत्तर देता है, तो इस प्रकार की अनुक्रिया का विश्लेषण करते समय मनोवैज्ञानिक इसे मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस संकेतक या श्रेणी से संबंधित मानते हैं? उत्तर प्रदेश के खनिज संसाधनों और औद्योगिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों में चूना पत्थर (Limestone), कोयला, नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले और डोलोमाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि ललितपुर जिला यूरेनियम, तांबा और रॉक फॉस्फेट के भंडारों के लिए जाना जाता है। 2. उत्तर प्रदेश का 'नोएडा' (Gautam Buddh Nagar) क्षेत्र 'इलेक्ट्रॉनिक सिटी' के रूप में विकसित किया गया है, और राज्य सरकार द्वारा स्थापित 'उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण' (UPSIDA) का मुख्यालय कानपुर में स्थित है। 3. राज्य में स्थित 'कानपुर नगर' को उसके चमड़ा उद्योग के कारण 'उत्तर भारत का मैनचेस्टर' कहा जाता है, जबकि कांच की चूड़ियों और हस्तशिल्प के लिए विश्व प्रसिद्ध 'फिरोजाबाद' शहर को 'सुहाग नगरी' के नाम से भी जाना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'वाक्य रचना' और 'अर्थ के आधार पर वाक्य भेद' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अर्थ के आधार पर वाक्य के कुल आठ भेद होते हैं, जिनमें 'विधानवाचक', 'निषेधवाचक', 'प्रश्नवाचक', 'आज्ञावाचक', 'इच्छावाचक', 'संदिग्धवाचक' (या संदेहवाचक), 'संकेतवाचक' और 'विस्मयबोधक' वाक्य शामिल हैं। 2. 'शायद आज शाम को भारी वर्षा हो' यह वाक्य 'संदेहवाचक वाक्य' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, क्योंकि इसमें क्रिया के होने में संदेह या अनिश्चितता का बोध होता है। 3. 'यदि तुम परिश्रम करते, तो अवश्य सफल होते' यह वाक्य 'इच्छावाचक वाक्य' के अंतर्गत आता है, क्योंकि इसमें वक्ता अपनी किसी तीव्र इच्छा या शुभकामना को व्यक्त कर रहा होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धिमत्ता के आधुनिक सूचना प्रक्रमण सिद्धांतों (Information Processing Theories of Intelligence)' के संदर्भ में, रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धिमत्ता का त्रिआयामी/त्रितंत्र मॉडल' (Triarchic Theory of Intelligence) के अंतर्गत 'घटकीय या विश्लेषणात्मक बुद्धिमत्ता' (Componential/Analytical Intelligence) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe) और 'अंसुलेट गाइरस' (Angular Gyrus) के बीच कार्यकारी नियंत्रण (Executive Control), अमूर्त तर्क और तार्किक समस्याओं के समाधान की सक्रियण गतिकी, तथा जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के चरणों' (विशेषकर मूर्त एवं औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान आधारित शिक्षाशास्त्र (Problem-based Pedagogy) और विद्यार्थियों में उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, आलोचनात्मक चिंतन व तार्किक क्षमता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के संदर्भ में, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) के अंतर्गत 'आत्मकेन्द्रित सोच' (Egocentrism), 'संरक्षण का अभाव' (Lack of Conservation) और 'अनुत्क्रमणीयता' (Irreversibility) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - vmPFC) और 'इंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex) के बीच परिप्रेक्ष्य-ग्रहण (Perspective-taking) की विसंगति, तथा जॉन फ्लवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित 'दृश्य परिप्रेक्ष्य-ग्रहण' (Visual Perspective-Taking: Level 1 and Level 2) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, खेल-आधारित शिक्षाशास्त्र (Play-based Pedagogy) और विद्यार्थियों में विकेंद्रीकरण, तार्किक लचीलेपन व संज्ञानात्मक परिपक्वता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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