त्वरित लिंक्स
UPTET
13 views
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'विशेष आवश्यकता वाले बालक और समावेशी शिक्षा' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के 'तीव्र प्रणालीकरण-सहानुभूति सिद्धांत' (Hyper-systemizing and Empathizing Theory) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS), 'मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (mPFC), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कास' (STS) के बीच सामाजिक-संवेगात्मक अनुकरण, थ्योरी ऑफ माइंड (Theory of Mind - ToM) की विसंगति, और अत्यधिक व्यवस्थित पैटर्न पहचान की सक्रियण गतिकी, तथा साइमन बैरन-कोहेन (Simon Baron-Cohen) के 'एम्पैथाइजिंग-सिस्टमिटाइजिंग मॉडल' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, स्ट्रक्चर्ड विजुअल-सपोर्टेड पेडागोजी (Structured Visual-Supported Pedagogy) और विद्यार्थियों में सामाजिक संचार कौशल, संवेगात्मक नियमन व समग्र समावेशी सहभागिता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से ग्रस्त बालकों में मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS) और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कास' (STS) में विसंगति पाई जाती है, जो सामाजिक अनुकरण और 'थ्योरी ऑफ माइंड' (ToM) को प्रभावित करती है। साइमन बैरन-कोहेन के 'हाइपर-सिस्टमिटाइजिंग' सिद्धांत के अनुसार, ऐसे बच्चों में पैटर्न पहचान मजबूत होती है लेकिन सहानुभूति और सामाजिक संचार में कठिनाई होती है। इसे 'स्ट्रक्चर्ड विजुअल-सपोर्टेड पेडागोजी' और PECS जैसे उपकरणों के माध्यम से समावेशी कक्षा में सफलतापूर्वक संबोधित किया जा सकता है।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों (Wildlife Sanctuaries) और उनकी स्थापना वर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार (चंदौली) - स्थापना वर्ष 1957
2. हस्तिनापुर वन्यजीव विहार (मेरठ-मुजफ्फरनगर) - स्थापना वर्ष 1986
3. किशनपुर वन्यजीव विहार (लखीमपुर खीरी) - स्थापना वर्ष 1972
4. कतरनियाघाट वन्यजीव विहार (बहराइच) - स्थापना वर्ष 1976
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'स्मृति और प्रग्रहण (Memory and Encoding) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, हर्बिंग एबिंगhaus (Hermann Ebbinghaus) द्वारा प्रतिपादित 'विस्मरण वक्र' (Forgetting Curve) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' के बीच अल्पकालिक स्मृति से दीर्घकालिक स्मृति में सूचना के समेकन (Memory Consolidation) की सक्रियण गतिकी, तथा रिचर्ड शिफ़्रिन (Richard Shiffrin) एवं रिचर्ड एटकिंसन (Richard Atkinson) द्वारा प्रतिपादित 'मल्टी-स्टोर मॉडल' (Multi-store Memory Model) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, अंतरालित पुनरावृत्ति (Spaced Repetition) रणनीतियों और विद्यार्थियों में दीर्घकालिक ज्ञान प्रतिधारण व संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'सार्वभौमिक डिज़ाइन (Universal Design for Learning - UDL)' के सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक डिज़ाइन का उद्देश्य विकलांग या विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अलग से पाठ्यक्रम का निर्माण करना है ताकि उन्हें मुख्यधारा से दूर रखा जा सके।
2. UDL के तीन मुख्य सिद्धांत हैं: अधिगम के लिए एकाधिक साधन (Multiple Means of Representation), अभिव्यक्ति के साधन (Multiple Means of Action and Expression), और सहभागिता के साधन (Multiple Means of Engagement)।
3. यह दृष्टिकोण सीखने की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए लचीले शिक्षण वातावरण और विधियों के उपयोग पर जोर देता है।
4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) दोनों ही इस बात की वकालत करते हैं कि पाठ्यचर्या को इस प्रकार डिजाइन किया जाना चाहिए जो कक्षा के सभी विविध शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायुगत संदर्भ में, 'भाबर, तराई तथा मैदानी' क्षेत्रों के जल-निकास और भू-आकृतिक लक्षणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भाबर क्षेत्र में नदियाँ हिमालय से उतरते समय भारी मात्रा में कंकड़, पत्थर और बोल्डर जैसे मोटे अवक्षेपों का निक्षेपण करती हैं, जिसके कारण इस पारगम्य (Permeable) क्षेत्र में अधिकांश छोटी नदियाँ धरातल से विलुप्त होकर भूमिगत रूप से प्रवाहित होती हैं।
2. तराई क्षेत्र भाबर पेटी के ठीक दक्षिण में स्थित एक विस्तृत, नम और दलदली पट्टी है, जहाँ भाबर में भूमिगत हुई नदियाँ पुनः धरातल पर प्रकट हो जाती हैं और इस क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर बहुत ऊँचा होता है।
3. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ (जैसे- चंबल, बेतवा, केन और टोंस) उत्तर की ओर प्रवाहित होते हुए गंगा या यमुना में मिलती हैं और अपने मार्ग में गहरी खड्डों (Ravines) तथा बीहड़ों का निर्माण करती हैं, जो विशेष रूप से इटावा, औरैया और जालौन जिलों में अत्यधिक दृश्यमान हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ चिकनी मिट्टी की प्रधानता वाली होती हैं, जो अत्यधिक जल ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं और सूखने पर इनमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं।
2. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में मिलने वाली 'धूर' या 'बलुई-दोमट' मृदा कृषि के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त होती है क्योंकि इसमें नाइट्रोजन और ह्यूमस की मात्रा शून्य होती है।
3. उत्तर प्रदेश में कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones) हैं, जो राज्य की विविध भौगोलिक और climatic परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.