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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की प्रक्रिया और संज्ञानात्मक विकास' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के चरण' (संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक और औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus), और 'डॉसोलेटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच स्कीमा निर्माण (Schema Formation), एसिमिलेशन-अकोमोडेशन (Assimilation and Accommodation), और कार्यकारी स्मृति (Working Memory) के बीच की सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के प्रतिनिधित्व के तरीके' (Enactive, Iconic, and Symbolic Modes) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, डिस्कवरी-बेस्ड कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Discovery-Based Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, अमूर्त समस्या-समाधान कौशल व समग्र संज्ञानात्मक संतुलन (Equilibration) के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

व्याख्या: जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत और जेरोम ब्रूनर का प्रतिनिधित्व का सिद्धांत (Enactive, Iconic, Symbolic) दोनों ही बच्चों में संज्ञानात्मक संरचनाओं (Schemas) के विकास की व्याख्या करते हैं। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, जैसे-जैसे बच्चा संवेदी-गामक से मूर्त और फिर औपचारिक अवस्था में बढ़ता है, पैरिएटल लोब (स्थानिक और तार्किक प्रसंस्करण के लिए) और डॉसोलेटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (कार्यकारी कार्य और अमूर्त योजना के लिए) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ब्रूनर का 'सिम्बॉलिक मोड' भाषा और प्रतीकों के माध्यम से उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक कौशल को सक्षम बनाता है, जो पियाजे के चरणों के साथ सहज रूप से संरेखित होकर समावेशी कक्षाओं में 'डिस्कवरी पेडागोजी' को सुदृढ़ करता है। अतः विकल्प (A) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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