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Indian Polity
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भारत में 'त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था' का सुझाव किस समिति ने दिया था?

Detailed Explanation

बलवंत राय मेहता समिति ने 1957 में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के लिए त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का सुझाव दिया था।
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Related Questions

→ भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 12-35) और उनसे संबंधित न्यायिक निर्णयों एवं अपवादों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडल के अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा को भी शामिल किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को अनुच्छेद 13 के अधीन 'विधि' नहीं माना जा सकता। 2. अनुच्छेद 31A के अंतर्गत जमींदारी उन्मूलन और कृषि सुधारों से संबंधित कानूनों को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से संरक्षित करने के लिए नौवीं अनुसूची का प्रावधान मूल संविधान में ही किया गया था, जिसे प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, तथा इस अनुसूची में शामिल किए गए प्रत्येक कानून को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूर्णतः बाहर रखा गया है। 3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित या निराकृत कर सके ताकि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का उचित निर्वहन और अनुशासन बना रहे, तथा इस प्रकार के प्रतिबंध लगाने के लिए केवल संसद को ही कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, किसी राज्य के विधानमंडल को नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ और उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शक्तियों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र में परिवर्तन करने की विधाई शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से ही कोई विधेयक संसद के किसी भी सदन में पुनरस्थापित किया जा सकता है, और ऐसा विधेयक प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति के लिए संबंधित राज्य के विधानमंडल का विचार प्राप्त करना अनिवार्य है, भले ही उस राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त की गई राय संसद पर बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के अनुसार, अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश या गठन तथा सीमाओं और नामों में परिवर्तन करने के लिए बनाई गई विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माना जाएगा, जिसके लिए विशेष बहुमत और आधे राज्यों के अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग IV-क के अंतर्गत समाहित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) और उनके न्यायिक प्रवर्तन (Judicial Enforceability) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में स्थान नहीं दिया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर संविधान में जोड़ा गया, जिसमें समिति ने नागरिकों के लिए करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक अनिवार्य कर्तव्य बनाने की संस्तुति की थी। 2. संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत वर्तमान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वाँ कर्तव्य (6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना) 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था, तथा ये कर्तव्य नागरिकों के साथ-साथ भारत के राज्यक्षेत्र में निवास करने वाले सभी विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से और कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं। 3. यद्यपि मूल कर्तव्यों की प्रकृति प्रत्यक्ष रूप से न्यायोचित (Non-justiciable) है, किंतु उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि विधियों की संवैधानिकता (Constitutionality) का परीक्षण करते समय अदालतें मूल कर्तव्यों को ध्यान में रख सकती हैं, और संसद को यह विधाई शक्ति प्राप्त है कि वह कानून बनाकर इनके क्रियान्वयन को सुनिश्चित कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के भाग XIV के अंतर्गत अनुच्छेद 315 से 323 तक संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का प्रावधान किया गया है, और दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद विधि द्वारा उन राज्यों के लिए 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JSPSC) का गठन कर सकती है, जो एक संवैधानिक निकाय है। 2. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है; किंतु संघ आयोग के सदस्यों को उनके पद से केवल राष्ट्रपति ही हटा सकते हैं, जबकि राज्य आयोग के सदस्यों को हटाने की शक्ति भी केवल राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं। 3. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को उसके पद से 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर हटाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा मामले को उच्चतम न्यायालय के पास जाँच हेतु भेजा जाना अनिवार्य होता है, और यदि उच्चतम न्यायालय अपनी जाँच के पश्चात उस सदस्य को हटाने की संस्तुति कर देता है, तो राष्ट्रपति के लिए उस संस्तुति को मानना अनिवार्य (बध्यकारी) होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में पारित 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' और 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के तहत वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और वाणिज्यिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई, जिससे द्वैध शासन (Double Government) की शुरुआत हुई। 3. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से ही पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्रों को 'ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र के अधीन भारतीय भू-भाग' (British Possessions in India) कहा गया, और गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या चार से घटाकर तीन कर दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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