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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता और divergent thinking' (Creativity and Divergent Thinking) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जोसफ गिल्फोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन के आयाम' (फ्लेक्सिबिलिटी, फ्लुएंसी, ओरिजिनलिटी और एलैबोरेशन) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'एक्सेक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (Executive Control Network - ECN), और 'सेलियंट नेटवर्क' (Salience Network) के बीच वैचारिक लचीलेपन, अंतर्दृष्टि (Insight Generation), और नवीनता प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डी बोनो (Edward de Bono) के 'पार्श्वीय चिंतन' (Lateral Thinking) मॉडल के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Creativity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में समस्या-समाधान कौशल, मुक्त-अंत वाले प्रश्नों (Open-ended Questions) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सृजनात्मकता (Creativity) और अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) का न्यूरो-संज्ञानात्मक अध्ययन यह दर्शाता है कि मस्तिष्क का 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) नवीन और कल्पनाशील विचारों को उत्पन्न करने में सहायक होता है, जबकि 'एक्सेक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (ECN) उन विचारों का मूल्यांकन और चयन करता है। जोसफ गिल्फोर्ड (J.P. Guilford) के अपसारी चिंतन के आयाम (जैसे लचीलापन, धाराप्रवाहता और मौलिकता) तथा एडवर्ड डी बोनो का पार्श्वीय चिंतन बच्चों में समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ाते हैं। प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' के तहत खुले और चुनौतीपूर्ण प्रश्न पूछकर बच्चों की इन तंत्रिका प्रणालियों और संज्ञानात्मक क्षमताओं का समग्र विकास किया जा सकता है।
Related Questions
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख विशेषताएँ हैं?
1. इस अवस्था का समय सामान्यतः 11 वर्ष से वयस्कता (15 वर्ष और उससे आगे) तक होता है, जिसमें बालक अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) और निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning) करने में सक्षम हो जाता है।
2. बालक इस स्तर पर वैज्ञानिक पद्धति की तरह सोच सकता है और किसी समस्या के समाधान के लिए सभी संभावित तार्किक विकल्पों या परिकल्पनाओं (Hypotheses) का व्यवस्थित रूप से परीक्षण कर सकता है।
3. इस अवस्था में पहुँचकर बालक 'संरक्षण' (Conservation) और 'श्रेणीबद्धता' (Classification) के बुनियादी सिद्धांतों को पहली बार सीखता है, जो कि इससे पूर्व की पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में पूरी तरह से अनुपस्थित होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत के किस राज्य में स्थित है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-आकृतिक विभाजन के संदर्भ में, राज्य का कौन सा क्षेत्र प्राचीनतम 'अरावली पर्वतमाला' के अवशेषों और प्रायद्वीपीय पठार के उत्तरward विस्तार से निर्मित है, जहाँ मुख्य रूप से लाल मृदा, ग्रेनाइट और नीस चट्टानें पाई जाती हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की रणनीतियाँ और metacognition (अधि-संज्ञानात्मक्ता)' के संदर्भ में, जॉन फ्लैवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित 'अधि-संज्ञानात्मक ज्ञान और विनियमन' (Metacognitive Knowledge and Regulation) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'पूर्ववर्ती सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - ACC) और 'इंसुला' (Insula) के बीच स्व-निगरानी (Self-Monitoring), त्रुटि पहचान (Error Detection) और संज्ञानात्मक नियंत्रण (Cognitive Control) की सक्रियण गतिकी, तथा रेमंड ब्राउन (Ann L. Brown) द्वारा प्रतिपादित 'अधि-संज्ञानात्मक रणनीतियों के कार्यकारी प्रबंधन' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, स्व-नियामक अधिगम (Self-Regulated Learning - SRL) और विद्यार्थियों में उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, स्वायत्त समस्या-समाधान व चिंतन कौशल के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि-जलवायु प्रदेशों और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) में विभाजित किया गया है, और यहाँ की सर्वाधिक विस्तृत व उपजाऊ जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) को दो भागों—खादर (नवीन जलोढ़) और बांगर (प्राचीन जलोढ़) में बाँटा जाता है, जिसमें पोटाश और चूने की अधिकता होती है परंतु नाइट्रोजन एवं ह्यूमस की कमी पाई जाती है।
2. राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' और 'भाँवर' प्रकार की मृदाएँ अत्यधिक चिकनी और उपजाऊ होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है, और सूखने पर इनमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं, जिसके कारण इन्हें स्थानीय रूप से 'कपास की मिट्टी' या काली कपास मृदा के समकक्ष माना जाता है।
3. उत्तर प्रदेश में 'लाल मृदा' (Red Soil) मुख्य रूप से मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों के पठारी एवं वनाच्छादित क्षेत्रों में पाई जाती है, जो कि रवेदार विंध्यन चट्टानों के टूटने-फूटने से बनी है और इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा जैविक पदार्थों की भारी कमी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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