त्वरित लिंक्स
UPTET
17 views
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं अधिगम की बाधाएं' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' (Autism Spectrum Disorder - ASD) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS), 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कास' (Superior Temporal Sulcus - STS), और 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN) के बीच सामाजिक-संवादात्मक विफलता, मानसिक सिमुलेशन में कमी, और 'थ्योरी ऑफ़ माइंड' (Theory of Mind) की शिथिलता की सक्रियण गतिकी, तथा साइमन बैरन-कोहेन (Simon Baron-Cohen) के 'एम्पैथाइजिंग-सिस्टमेटाइजिंग (E-S) थ्योरी' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-ऑटिज्म ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Autism Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सामाजिक-संवेगात्मक कौशल, दृश्य-आधारित संरचनात्मक दिनचर्या (Visual Schedules) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार है जो मुख्य रूप से सामाजिक संचार, अंतःक्रिया और सीमित/पुनरावृत्ति व्यवहारों से जुड़ा है। मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS), 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कास' (STS), और 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) सामाजिक संज्ञान और 'थ्योरी ऑफ़ माइंड' (दूसरों के दृष्टिकोण को समझने की क्षमता) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ASD में इन तंत्रिका नेटवर्कों की शिथिलता के कारण सामाजिक-संवादात्मक विफलता देखी जाती है। साइमन बैरन-कोहेन की एम्पैथाइजिंग-सिस्टमेटाइजिंग (E-S) सिद्धांत यह बताता है कि ऑटिज्म वाले व्यक्तियों में सहानुभूति (Empathizing) की तुलना में व्यवस्थीकरण (Systematizing) की प्रवृत्ति अधिक होती है। प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में 'न्यूरो-ऑटिज्म ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' के तहत दृश्य दिनचर्या (Visual Schedules), सामाजिक कहानियां (Social Stories) और संरचित वातावरण प्रदान करके इन न्यूरो-संज्ञानात्मक बाधाओं को पाटा जा सकता है और विद्यार्थियों की संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता का संवर्धन किया जा सकता है। अतः विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
Related Questions
→
हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'शब्द विचार' और 'विकारी-अविकारी शब्दों' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विकारी शब्द वे शब्द होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के आधार पर परिवर्तन (विकार) आ जाता है, और इसके अंतर्गत संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया शब्दों को शामिल किया जाता है।
2. अविकारी शब्द (अव्यय) वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन या कारक के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है, तथा इसके प्रमुख भेदों में क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक शामिल हैं।
3. 'समुच्चयबोधक अव्यय' वे शब्द होते हैं जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे पदों के साथ जोड़ते हैं, जबकि 'संबंधबोधक अव्यय' दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
थॉर्नडाइक के सीखने के सिद्धांत (Trial and Error Theory) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा नियम सीखने के 'गौण नियमों' (Secondary Laws) के अंतर्गत शामिल नहीं है?
→
राष्ट्रीय उद्यान 'दुधवा नेशनल पार्क' उत्तर प्रदेश के किस जनपद में स्थित है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences: भाषाई, तार्किक-गणितीय, स्थानिक, संगीतात्मक, शारीरिक-गतिकी, अंतर्व्यक्तिगत, अंतravýaktiगत और प्रकृतिवादी बुद्धि) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'फ्रंटल लोब', 'ऑक्सीपिटल लोब', 'टेम्पोरल लोब' और 'सेरिबैलम' के बीच विशिष्ट संज्ञानात्मक डोमेन मॉड्यूलरिटी (Cognitive Domain Modularity), क्रॉस-मॉडेल इंटिग्रेशन, और कार्यकारी नियंत्रण (Executive Control) की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) के 'बुद्धि के त्रитаंत्रिक सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence: विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, डिफरेंशिएटेड पेडागोजी (Differentiated Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुआयामी क्षमताओं, व्यक्तिगत भिन्नताओं के अनुकूल शिक्षण व समग्र बौद्धिक विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ में प्राचीन 'महाजनपद काल' और वर्तमान प्रशासनिक भूगोल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राचीन बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' के अनुसार, छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 16 महाजनपदों में से वर्तमान उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में कुल 8 महाजनपद (जैसे- कुरु, पांचाल, शूरसेन, वत्स, मल्ल, काशी, कोशल और चेदि) पूर्णतः या आंशिक रूप से स्थित थे।
2. प्राचीन 'मल्ल महाजनपद' की राजधानी 'कुशीनगर' (कुशीनारा) थी, जहाँ भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था, और यह क्षेत्र वर्तमान उत्तर प्रदेश के देवरिया-कुशीनगर सीमावर्ती क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
3. प्राचीन 'चेदि महाजनपद' की राजधानी 'शक्तिमती' थी, जो वर्तमान उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट के पास बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित थी, और महाभारत काल में यह राजा शिशुपाल के शासन क्षेत्र के अंतर्गत आता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.