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Indian Polity
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भारतीय संविधान के किस संशोधन को 'लघु संविधान' (Mini Constitution) कहा जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1976 के 42वें संविधान संशोधन में इतने व्यापक बदलाव किए गए कि इसे 'लघु संविधान' की संज्ञा दी गई।
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भारत के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की संवैधानिक स्थिति, कार्यप्रणाली और विधायी उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67 के खंड (b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा द्वारा एक ऐसा संकल्प पारित किया जाना आवश्यक है जिसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित किया गया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार के संकल्प को प्रस्तुत करने के लिए कम से कम चौदह दिन पूर्व की लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
2. अनुच्छेद 75(3) के अंतर्गत मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि यदि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को अपना त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है, और इसमें केवल कैबिनेट मंत्रियों को ही नहीं बल्कि राज्य मंत्रियों और उप-मंत्रियों को भी त्यागपत्र देना पड़ता है।
3. अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संबंध में और मंत्रिपरिषद के निर्णयों के प्रस्तावों से संबंधित सभी सूचनाएँ राष्ट्रपति को संसूचित करे, तथा यदि राष्ट्रपति ऐसा निर्देश दे, तो मंत्रिपरिषद के समक्ष किसी ऐसे विषय को विचार के लिए रखे जिस पर किसी मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से विनिश्चय कर लिया है किंतु मंत्रिपरिषद ने उस पर सामूहिक रूप से विचार नहीं किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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दही में किस प्रकार का अम्ल पाया जाता है?
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों और उनके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से कंपनी के राजनीतिक और व्यापारिक कार्यों को पृथक किया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (नियंत्रण बोर्ड) की स्थापना की गई जो राजनीतिक मामलों की देखरेख करता था, और इसे ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य के अधीन रखा गया।
2. चार्टर अधिनियम, 1833 द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया, तथा इस अधिनियम ने मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों की विधायी शक्तियों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया, जिससे भारत में केंद्रीय केंद्रीकृत प्रशासन की नींव पड़ी।
3. चार्टर अधिनियम, 1853 के द्वारा गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को स्पष्ट रूप से अलग किया गया, जिसके तहत परिषद में छह नए पार्षदों को जोड़ा गया जिन्हें 'विधान पार्षद' (Legislative Councillors) कहा गया, और सिविल सेवकों की भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली की शुरुआत की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उससे संबंधित न्यायिक दृष्टांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुता' के आदर्शों को अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम से ग्रहण किया गया है।
2. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत इसमें संशोधन कर सकती है, बशर्ते मूल ढांचे का उल्लंघन न हो।
3. 'गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य' (1967) और 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य' (1973) के बीच के न्यायिक सफर में प्रस्तावना की स्थिति को स्पष्ट करते हुए अंततः यह स्थापित किया गया कि प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा यह गैर-न्यायोज्य (Non-justiciable) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV-A के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, किंतु इस समिति ने करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में शामिल करने की संस्तुति की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।
2. मूल प्रकृति से ये कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं; तथा संविधान में इनका प्रवर्तन (Enforcement) सीधे न्यायालयों के माध्यम से नहीं किया जा सकता है, किंतु संसद विधि द्वारा इनके क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त दंड या शास्ति का प्रावधान कर सकती है।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य जोड़ा गया, जिससे मूल कर्तव्यों की कुल संख्या बढ़कर वर्तमान में ग्यारह हो गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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