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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के पठार' (Plateaus of Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, गैरी और अन्य मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम पठार के न्यूरो-बायोलॉजिकल कारणों' (थकान, प्रेरणा की कमी, गलत शिक्षण विधियाँ और जटिलता स्तर में अचानक वृद्धि) तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कार्यकारी अतिभार' (Prefrontal Cortex Executive Overload - कार्यशील स्मृति की सीमा और संज्ञानात्मक थकान), 'लॉसस ऑफ़ डोपामिनर्जिक मोटिवेशनल ड्राइव' (Loss of Dopaminergic Motivational Drive - न्यूरोट्रांसमीटर थकावट और घटता सुदृढ़ीकरण), और 'हिप्पोकैम्पस में सिनेप्टिक समेकन की अड़चन' (Hippocampal Consolidation Bottleneck - सूचनाओं के दीर्घकालिक भंडारण में न्यूरोनल संतृप्ति) के बीच तंत्रिका नेटवर्क की शिथिलता, सिनेप्टिक प्लास्टिसिटी की कमी, तथा न्यूरोनल समन्वय के अवरोध की सक्रियण गतिकी, तथा ब्रूनर के 'अधिगम के अन्वेषण मॉडल' (Discovery Learning) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-प्लेटॉ ऑप्टिमाइज्ड रेमेडियल पेडागोजी' (Neuro-Plateau Optimized Remedial Pedagogy) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक नियमन, संज्ञानात्मक विश्राम रणनीतियाँ व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

अधिगम के पठार (Plateaus of Learning) सीखने की प्रक्रिया में आने वाले वे रुकावट के बिंदु हैं जहाँ प्रदर्शन में कोई प्रगति नहीं दिखाई देती। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, यह स्थिति प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कार्यकारी अतिभार (Executive Overload), कार्यशील स्मृति की सीमाओं, हिप्पोकैम्पस में सूचना समेकन की अड़चन और डोपामिनर्जिक रिवार्ड पाथवे में प्रेरणा की कमी के कारण उत्पन्न होती है। इसे पार करने के लिए 'न्यूरो-प्लेटॉ ऑप्टिमाइज्ड रेमेडियल पेडागोजी' के तहत संज्ञानात्मक विश्राम, शिक्षण विधियों में बदलाव, और सकारात्मक सुदृढ़ीकरण का उपयोग किया जाता है। अतः विकल्प (a) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
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