BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
1 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और आकलन (Assessment) के विशेष संदर्भ में, 'अधिगम के लिए आकलन' (Assessment for Learning) और 'अधिगम का आकलन' (Assessment of Learning) के मध्य मुख्य वैचारिक और व्यावहारिक अंतर को स्पष्ट करने वाला सबसे उपयुक्त कथन निम्नलिखित में से कौन सा है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र पाठ्यक्रम के अंतर्गत सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) में 'अधिगम के लिए आकलन' (Assessment for Learning) शिक्षण प्रक्रिया के दौरान निरंतर चलने वाली एक रचनात्मक (Formative) प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य छात्रों की अधिगम संबंधी कठिनाइयों का निदान करना और शिक्षण में आवश्यक सुधार करना होता है। इसके विपरीत, 'अधिगम का आकलन' (Assessment of Learning) आमतौर पर योगात्मक (Summative) प्रकृति का होता है जो किसी निश्चित शिक्षण अवधि (जैसे सत्र या इकाई के अंत) के बाद छात्रों के निष्पादन और उपलब्धि को मापने के लिए किया जाता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक सटीक और मनोवैज्ञानिक रूप से मान्य है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक कर्ट लेविन (Kurt Lewin) के 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'जीवन स्पेस या जीवन क्षेत्र' (Life Space) की अवधारणा—जिसके तहत किसी व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक वातावरण (Psychological Environment) और उसकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं, प्रेरणाओं तथा विश्वासों का संपूर्ण योग शामिल होता है जो किसी दिए गए समय में उसके व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से निर्धारित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के行为 (व्यवहार) परिवर्तन, प्रेरणा और व्यक्तिगत अंतरिक्ष के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित **'पारस्परिक निर्धारणवाद' (Reciprocal Determinism)** की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्तिगत कारक (संज्ञानात्मक, जैविक और भावनात्मक), व्यवहार (Behavior), और पर्यावरणीय प्रभाव (Environment) तीनों निरंतर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और त्रिकोणीय रूप से अंतःक्रिया करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), विकासात्मक लचीलेपन और एजेंसी (Human Agency) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉर्ज केली (George Kelly) के 'व्यक्तिगत निर्माण सिद्धांत' (Personal Construct Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मनोवैज्ञानिक अवधारणा—**'निर्माण विकल्पोक्ति' (Constructive alternativism)**—जिसे इस दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण के रूप में परिभाषित किया जाता है कि सभी लोगों की वास्तविकता की अपनी व्याख्या या 'निर्माण' (Constructs) होते हैं, और भविष्य की भविष्यवाणियों के लिए किसी भी वर्तमान निर्माण को संशोधित किया जा सकता है या एक नए विकल्प से बदला जा सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लचीले चिंतन, परिप्रेक्ष्य लेने (Perspective-taking) और संज्ञानात्मक पुनर्निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी शिक्षण सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) तथा 'सुगमकर्ता' (Facilitator) के रूप में शिक्षक की भूमिका के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'आत्म-निर्देशित अधिगम' (Self-Directed Learning), सार्थक व्यक्तिगत जुड़ाव और सशर्त या गैर-निर्णयात्मक सकारात्मक आदर (Unconditional Positive Regard) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शेपिंग या आकार देना' (Shaping) की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल, नवीन या अवांछित व्यवहार को क्रमिक अनुमानों (Successive Approximations) के नियम का उपयोग करते हुए सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) के माध्यम से धीरे-धीरे वांछित अंतिम लक्ष्य व्यवहार में परिवर्तित या रूपांतरित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के विशिष्ट कौशल विकास, सुधारात्मक शिक्षण और व्यवस्थित व्यवहार-परिवर्तन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.