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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage: 2-7 वर्ष) में बालकों द्वारा प्रदर्शित 'जीववाद' (Animism) और 'अहंप्रभाव' (Egocentrism) की संकल्पनाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक और विकासात्मक स्वरूप के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक सटीक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage) में 'जीववाद' (Animism) वह प्रवृत्ति है जिसके तहत बच्चे निर्जीव वस्तुओं (जैसे खिलौने, चंद्रमा, गाड़ी) में भी जीवन और सजीव भावनाएँ होने का आरोपण करते हैं। वहीं 'अहंप्रभाव' (Egocentrism) से तात्पर्य उस संज्ञानात्मक सीमा से है जिसमें बच्चा केवल अपने ही दृष्टिकोण (Perspective) से दुनिया को देख पाता है और वह यह नहीं समझ पाता कि अन्य व्यक्तियों का दृष्टिकोण उससे अलग हो सकता है (जिसे पियाजे के 'थ्री-माउंटेन टास्क' द्वारा सिद्ध किया गया था)। अतः विकल्प 'a' इन दोनों अवधारणाओं के सही और मनोवैज्ञानिक रूप से मान्य स्वरूप को दर्शाता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक कर्ट लेविन (Kurt Lewin) के 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'जीवन स्पेस या जीवन क्षेत्र' (Life Space) की अवधारणा—जिसके तहत किसी व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक वातावरण (Psychological Environment) और उसकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं, प्रेरणाओं तथा विश्वासों का संपूर्ण योग शामिल होता है जो किसी दिए गए समय में उसके व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से निर्धारित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के行为 (व्यवहार) परिवर्तन, प्रेरणा और व्यक्तिगत अंतरिक्ष के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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