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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लुई थर्स्टन (Louis Thurstone) के 'समूह कारक सिद्धांत' (Group Factor Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्राथमिक मानसिक योग्यताएं' (Primary Mental Abilities - PMAs)—विशेषकर 'वाचिक बोध' (Verbal Comprehension), 'संख्यात्मक योग्यता' (Numerical Ability), और 'स्थानिक संबंध' (Spatial Relations)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक भिन्नताओं, बौद्धिक प्रोफाइल के विश्लेषण और बहु-आयामी शैक्षणिक हस्तक्षेप (Multi-dimensional Educational Intervention) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
लुई थर्स्टन (Louis Thurstone) ने अपने 'समूह कारक सिद्धांत' (Group Factor Theory) में यह प्रतिपादित किया कि बुद्धि किसी एक सामान्य कारक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह कई 'प्राथमिक मानसिक योग्यताओं' (Primary Mental Abilities - PMAs) का समूह होती है, जैसे वाचिक बोध, शब्द प्रवाह, संख्यात्मक योग्यता, स्थानिक संबंध, स्मरण शक्ति, तार्किकता और प्रत्यक्षात्मक गति। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इसका मनोवैज्ञानिक निहितार्थ यह है कि प्रत्येक विद्यार्थी का बौद्धिक या संज्ञानात्मक प्रोफाइल अद्वितीय होता है। इसलिए, एक प्रभावी शिक्षक को 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) का उपयोग करना चाहिए ताकि विभिन्न प्राथमिक योग्यताओं वाले विद्यार्थियों को उनकी ताकतों के अनुसार सीखने और अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास करने का अवसर मिल सके। कथन 'b' इस सिद्धांत के वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपयोग को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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