त्वरित लिंक्स
MPTET
1 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम आयोजक' (Advance Organizer) तथा 'अवरोही अधिगम' (Subsumption Theory - समावेशन सिद्धांत) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) के साथ नई संकल्पनाओं के संज्ञानात्मक एकीकरण, दीर्घकालिक स्मृति में तार्किक संरचनाओं के निर्माण और सार्थक ज्ञान के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड औसुबेल (David Ausubel) का 'सार्थक मौखिक अधिगम और समावेशन सिद्धांत' (Subsumption Theory) इस बात पर जोर देता है कि नया ज्ञान तभी सार्थक होता है जब उसे शिक्षार्थी की पहले से मौजूद संज्ञानात्मक संरचना (Cognitive Structure) से जोड़ा जा सके। इसके लिए वे 'अग्रिम आयोजक' (Advance Organizers) का उपयोग करते हैं—जो मुख्य पाठ से पहले दिए जाने वाले परिचयात्मक और वैचारिक पुल होते हैं। विकल्प 'a' इस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत के वैज्ञानिक और तार्किक निहितार्थ को पूर्णतः सही रूप में स्पष्ट करता है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality Level) के दूसरे चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम या कानून का पालन बाहरी दबाव, दंड के भय या सामाजिक अनुमोदन के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वयं के आंतरिक रूप से विकसित सार्वभौमिक न्याय, मानवाधिकारों और अंतरात्मा के उन उच्च नैतिक सिद्धांतों के आधार पर करता है जो संपूर्ण मानवता के लिए न्यायसंगत और तार्किक रूप से अनिवार्य होते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक स्वायत्तता, तार्किक निर्णय लेने की क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, ब्रूनेर (Jerome Bruner) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के तीन चरणों - क्रियात्मक अवस्था (Enactive Stage), प्रतिबिम्बात्मक अवस्था (Iconic Stage), और सांकेतिक अवस्था (Symbolic Stage) - तथा उनके शिक्षण शास्त्रीय निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक सटीक है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड डी बोनो (Edward de Bono) के 'चिंतन कौशल और पार्श्व चिंतन' (Lateral Thinking) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण—**'छह चिंतन टोोपियाँ' (Six Thinking Hats)**—जिसके तहत किसी समस्या या निर्णय प्रक्रिया का विश्लेषण छह अलग-अलग रंगों की टोपी (सफेद, लाल, पीली, हरी, नीली, काली) के माध्यम से विभिन्न दृष्टिकोणों (जैसे भावनाएं, तथ्य, तार्किक जोखिम, रचनात्मकता, और नियंत्रण) से किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, संज्ञानात्मक लचीलेपन और आलोचनात्मक समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकन आत्मक अधिगम' (Observational Learning / Modeling) की प्रक्रिया के चार महत्वपूर्ण घटकों में से एक प्रमुख घटक—अर्थात् 'पुनरुत्पादन या मोटर पुनरुत्पादन' (Reproduction / Motor Reproduction)—की अवधारणा, जिसके तहत शिक्षार्थी अपने संज्ञानात्मक मस्तिष्क में संग्रहीत किसी मॉडल के व्यवहार के मानसिक प्रतीकों या बिंबों को वास्तविक शारीरिक क्रियाओं और व्यावहारिक कौशल में रूपांतरित करता है, अभ्यास करता है और अपने प्रदर्शन में निरंतर प्रतिक्रिया के माध्यम से सुधार करता है, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के कौशल अर्जन, व्यावहारिक अनुकरण और स्व-नियामक (Self-regulatory) अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advanced Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत किसी नवीन, जटिल और विस्तृत विषय-वस्तु को पढ़ाने से पहले छात्रों के सामने एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त परिचयात्मक सामग्री प्रस्तुत की जाती है जो उनके संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और ज्ञान के साथ नए संप्रत्ययों को जोड़ने या 'पुल का काम' करने का कार्य करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा के विस्तार, तार्किक अवबोध और दीर्घकालिक स्मरण शक्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.