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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory / Social Cognitive Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकनात्मक अधिगम' (Observational Learning / Modeling) की चार परस्पर संबंधित उप-प्रक्रियाओं—(1) अवधान (Attention), (2) धारण (Retention), (3) पुनरुत्पादन (Reproduction), और (4) अभिप्रेरण/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)—के साथ-साथ 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के vicarious reinforcement (प्रतिनिधिक पुनर्बलन), स्व-नियमन (Self-Regulation), और सकारात्मक व्यवहारिक मॉडलों के अनुकरण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार, अधिगम प्रत्यक्ष रूप से त्रुटि करने और पुनर्बलन पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूसरों के व्यवहार का अवलोकन करके भी होता है। इसकी चार प्रमुख उप-प्रक्रियाएँ हैं: (1) अवधान - मॉडल के व्यवहार पर ध्यान देना, (2) धारण - उस व्यवहार को स्मृति में संग्रहित करना, (3) पुनरुत्पादन - संग्रहित जानकारी को शारीरिक और मानसिक रूप से निष्पादित करना, और (4) अभिप्रेरण - उस व्यवहार को दोहराने के लिए प्रेरित होना। इसके अतिरिक्त, 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) व्यक्ति की उस क्षमता में विश्वास को दर्शाती है जिसके द्वारा वह किसी विशिष्ट परिस्थिति में सफलता प्राप्त कर सकता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में सकारात्मक मॉडलों (जैसे शिक्षक या सहपाठी) की प्रस्तुति और स्व-नियमन रणनीतियों के उपयोग से विद्यार्थियों की शैक्षणिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
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