त्वरित लिंक्स
MPTET
19 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, आईवान पावलव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित—(1) उद्दीपक सामान्यीकरण (Stimulus Generalization), (2) विभेदन (Discrimination), (3) विलोप (Extinction), और (4) स्वतः पुनःप्राप्ति (Spontaneous Recovery)—जैसी मूलभूत अनुबंधन प्रक्रियाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भावनात्मक सहचर्य, सकारात्मक/नकारात्मक आदतों के निर्माण, और भय या चिंता के निराकरण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के पाठ्यक्रम के अनुसार, आईवान पावलव का 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) बाल विकास और कक्षा-कक्षीय शिक्षण में बच्चों की भावनात्मक अनुक्रियाओं, आदतों के निर्माण और उनके संशोधन को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत की प्रमुख प्रक्रियाएं जैसे—(1) उद्दीपक सामान्यीकरण (Stimulus Generalization) बच्चों को समान परिस्थितियों में ज्ञान के स्थानांतरण में मदद करती है; (2) विलोप (Extinction) अवांछित व्यवहार या भय को दूर करने का वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है; और (3) स्वतः पुनःप्राप्ति (Spontaneous Recovery) यह बताती है कि पूर्व में सीखी गई अनुक्रियाएं उपयुक्त संकेत मिलने पर पुनः जागृत हो सकती हैं। चूँकि ये सभी मनोवैज्ञानिक अवधारणाएं शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से लागू होती हैं, अतः विकल्प (d) सबसे सटीक, संपूर्ण और वैज्ञानिक रूप से मान्य उत्तर है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवजन्य अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित **'मूर्त अनुभव से सक्रिय प्रयोग तक की प्रक्रिया' (Concrete Experience to Active Experimentation)**—जिसके तहत शिक्षार्थी पहले प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करता है, फिर उसका अवलोकन और वैचारिक चिंतन करता है, तत्पश्चात अमूर्त अवधारणाओं का निर्माण करके नवीन परिस्थितियों में अपने ज्ञान का सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation) करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के चक्रीय संज्ञान, व्यावहारिक कौशल और अनुभवात्मक स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय शैक्षणिक अवधारणा—**'करके सीखना' (Learning by Doing)**—जिसे केवल सैद्धांतिक और निष्क्रिय रूप से ज्ञान को सुनने या रटने के विपरीत, शिक्षार्थी की अपनी सक्रिय शारीरिक एवं मानसिक भागीदारी, व्यावहारिक प्रयोगों और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान के माध्यम से ज्ञान का सक्रिय निर्माण करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यावहारिक कौशल विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अधिगम शैली—**'अभिसारी अधिगम शैली' (Convergent Learning Style)**—जिसे उस व्यावहारिक मानसिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ शिक्षार्थी अमूर्त अवधारणाओं (Abstract Conceptualization) और सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation) का उपयोग करके तकनीकी समस्याओं के एकल, सर्वोत्तम और सटीक समाधान तलाशता है तथा विचारों को व्यावहारिक उपयोग में लाने में दक्ष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विश्लेषण, तकनीकी कौशल और समस्या-समाधान की वैज्ञानिक क्षमताओं के संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद या प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)**—जिसे उस मूलभूत मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत यदि किसी उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के बीच का संबंध किसी संतोषजनक परिणाम, पुरस्कार या सुखद स्थिति द्वारा अनुसरित होता है, तो उस S-R बंध (S-R Bond) या संयोजन की ताकत में वृद्धि हो जाती है, जबकि असंतोषजनक या कष्टप्रद परिणाम मिलने पर वह संबंध कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सुदृढ़ीकरण, संतोषजनक अनुक्रियाओं के चयन और स्थायी अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'लग्नता/संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'असुरक्षित-प्रतिरोधी संलग्नता' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment) की अवधारणा—जिसके तहत शिशु प्राथमिक देखभालकर्ता (Caregiver) की अनुपस्थिति में अत्यधिक संकट और चिंता प्रदर्शित करते हैं, तथा देखभालकर्ता के वापस लौटने पर एक साथ निकटता की चाहत और क्रोध/विरोध (Ambivalence) दोनों का जटिल व विरोधाभासी व्यवहार दर्शाते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), असुरक्षा बोध, और शिक्षक-विद्यार्थी अंतःक्रिया के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.