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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) एवं 'अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'सार्थक या अनुभवात्मक अधिगम' (Significant/Experiential Learning) की अवधारणा तथा इसके प्रमुख आयामों—(1) व्यक्तिगत सहभागिता (Personal Involvement), (2) स्व-आरंभिक (Self-Initiated), (3) व्यापक मूल्यांकन (Pervasive), और (4) शिक्षार्थी द्वारा मूल्यांकन (Evaluated by Learner)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'सुगमकर्ता' (Facilitator of Learning) के रूप में शिक्षक की भूमिका, 'बिना शर्त सकारात्मक आदर' (Unconditional Positive Regard), और आत्म-वास्तविकीकरण (Self-Actualization) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के दृष्टिकोण से, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) का मानवतावादी उपागम (Humanistic Approach) और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत (Experiential Learning Theory) शिक्षा में शिक्षार्थी-केंद्रित (Learner-Centered) दृष्टिकोण का समर्थन करता है। रोजर्स के अनुसार, ज्ञानात्मक अधिगम और अनुभवात्मक (सार्थक) अधिगम के बीच अंतर है। अनुभवात्मक अधिगम में विद्यार्थी की पूरी शख्सियत (संज्ञानात्मक और भावनात्मक दोनों) शामिल होती है। इस प्रक्रिया में शिक्षक का मुख्य कार्य ज्ञान थोपना नहीं, बल्कि एक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) बनना है जो ऐसा मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित वातावरण तैयार करे जहाँ विद्यार्थी बिना किसी भय के अपनी पूरी क्षमता का विकास कर सकें। इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं—बिना शर्त सकारात्मक आदर (Unconditional Positive Regard), तानुभूतिपूर्ण समझ (Empathic Understanding), और शिक्षक की प्रामाणिकता या पारदर्शिता (Authenticity)। अत: विकल्प (c) इस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत का सबसे प्रामाणिक और वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत करता है।
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