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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकनयात्मक अधिगम' (Observational Learning) के चार अंतःसंबंधित घटकों—(1) ध्यान (Attention), (2) धारणा/स्मरण (Retention), (3) पुनरुत्पादन (Reproduction), और (4) अभिप्रेरणा/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)—तथा 'पारस्परिक निर्धारणवाद' (Reciprocal Determinism) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रतिरूपण (Modeling), स्व-प्रभावकारिता (Self-Efficacy), और परोक्ष पुनर्बलन (Vicarious Reinforcement) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) का सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत इस बात पर जोर देता है कि व्यक्ति अपने सामाजिक परिवेश का अवलोकन करके सीखते हैं। इसमें 'पारस्परिक निर्धारणवाद' (Reciprocal Determinism) एक केंद्रीय अवधारणा है, जो यह दर्शाती है कि व्यक्तिगत कारक (संज्ञानात्मक, भावनात्मक और जैविक), व्यवहार और पर्यावरणीय घटनाएँ आपस में अंतःसंबंधित होकर एक-दूसरे को निरंतर प्रभावित करती हैं। इसके अतिरिक्त, अवलोकनयात्मक अधिगम के चार चरण—ध्यान, धारणा, पुनरुत्पादन और अभिप्रेरणा—तथा स्व-प्रभावकारिता (Self-Efficacy) विद्यार्थियों में आत्म-नियमन और प्रभावी शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्राकृतिकवादी बुद्धि' (Naturalist Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट संज्ञानात्मक और संवेदी क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति प्रकृति के विभिन्न रूपों (जैसे कि जीव-जंतुओं, वनस्पतियों, पारिस्थितिकी और मौसम के पैटर्न) को सूक्ष्मता से पहचानने, वर्गीकृत करने और उनके साथ सफलतापूर्वक तालमेल बिठाने में पूरी तरह सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, अवलोकन कौशल और अनुभवात्मक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 के अनुसार, गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चे की गणितीयकरण की क्षमता का विकास करना है। इस संदर्भ में 'गणित का गणितीयकरण' करने से क्या तात्पर्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights - स्तर 3, चरण 5) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून लचीले सामाजिक अनुबंध हैं जिन्हें समाज की भलाई और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक रूप से बदला जा सकता है, न कि वे समाज द्वारा थोपे गए कोई कठोर और अपरिवर्तनीय आदेश हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, आलोचनात्मक न्यायबोध और नैतिक तार्किकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभाویता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस व्यक्तिगत विश्वास या मनोवैज्ञानिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति यह आकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और वांछিত परिणाम प्राप्त करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लक्ष्य-निर्धारण, दृढ़ता, आंतरिक अभिप्रेरण और शैक्षणिक निष्पादन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD), 'मचान/सहारा' (Scaffolding), और 'संज्ञानात्मक विकास में संस्कृति एवं भाषा की केंद्रीय भूमिका' के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक वाक् (Inner Speech), सामाजिक अंतःक्रिया और पायरॉजिकल टूल्स (Psychological Tools) के माध्यम से उच्च-स्तरीय मानसिक कार्यों के संवर्द्धन और स्व-नियमन (Self-Regulation) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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