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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रतिनिधित्व प्रणालियों में से एक—'प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व' (Iconic Representation)—की अवधारणा, जिसके तहत शिक्षार्थी दुनिया को मानसिक छवियों, दृश्यों, आरेखों और संवेगात्मक प्रतीकों के माध्यम से समझता और प्रस्तुत करता है (जो संक्रियात्मक अवस्था और प्रतीकात्मक अवस्था के बीच की कड़ी होती है), के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के दृश्य-श्रव्य संज्ञान, स्थानिक बुद्धिमत्ता (Spatial Intelligence), और अवधारणात्मक प्रतिरूपण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास तीन चरणों या प्रतिनिधित्व प्रणालियों में होता है: 1. अधिनियमक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation - कार्यों और गामक क्रियाओं द्वारा), 2. प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation - मानसिक छवियों, दृश्यों और आरेखों द्वारा), और 3. प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation - भाषा, शब्दों और अमूर्त गणितीय प्रतीकों द्वारा)। 'प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व' (Iconic Representation) में बच्चा या शिक्षार्थी वस्तुओं को उनके प्रत्यक्ष शारीरिक संपर्क के बिना मानसिक छवियों (Mental Images), रेखाचित्रों और दृश्यों के माध्यम से संचित और प्रसंस्कृत करता है। यह चरण अधिनियमक (कार्यों पर आधारित) और प्रतीकात्मक (भाषा/अमूर्तता पर आधारित) चरणों के बीच एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सेतु का कार्य करता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इसका उपयोग दृश्य सहायक सामग्री (Visual Aids), माइंड मैप और ग्राफिक ऑर्गेनाइजर्स के माध्यम से विद्यार्थियों के स्थानिक संज्ञान और अवधारणात्मक स्पष्टता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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