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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्टवादियों (Gestalt Psychologists—जैसे वर्दीमर, कोहलर और कोफ्का) के 'अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत' (Theory of Insightful Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अचानक संज्ञान' या 'अहा! अनुभव' (Aha! Experience / Sudden Cognitive Restructuring) की अवधारणा—जिसके तहत किसी समस्या का समाधान क्रमिक प्रयासों से न होकर संपूर्ण परिस्थिति के मानसिक पुनर्गठन (Mental Restructuring) द्वारा अचानक और अंतर्दृष्टिपूर्ण तरीके से प्राप्त होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान की समग्र समझ (Holistic Understanding), और अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों (जैसे मैक्स वर्दीमर, कोहलर और कोफ्का) के अनुसार, सीखना केवल अंधाधुंध प्रयास और त्रुटि का परिणाम नहीं है, बल्कि यह स्थिति की समग्रता को देखने और उसका मानसिक पुनर्गठन करने की क्षमता पर निर्भर करता है। 'सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत' (Insight Learning Theory) बताता है कि जब कोई व्यक्ति किसी समस्या की संपूर्ण परिस्थिति का निरीक्षण करता है, तो अचानक उसके मस्तिष्क में उसके संबंधों की स्पष्ट तस्वीर उभरती है, जिसे 'अहा! अनुभव' (Aha! Experience) या अचानक संज्ञान कहा जाता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों को रटने के बजाय समस्याओं को समग्र रूप से समझने, आलोचनात्मक रूप से सोचने और तार्किक अंतर्दृष्टि विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) के 'मानवीय आवश्यकताओं के पदानुक्रम सिद्धांत' (Theory of Human Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर की आवश्यकता—अर्थात् 'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण की आवश्यकता' (Need for Self-Actualization)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता, प्रतिभा और अंतर्निहित संभावनाओं का पूर्ण विकास और सदुपयोग करने के लिए प्रेरित होता है, और यह आवश्यकता तभी सक्रिय होती है जब उसकी पिछली सभी शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान संबंधी आवश्यकताएं संतोषजनक रूप से पूरी हो चुकी होती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा, रचनात्मकता के विकास और उनके संपूर्ण व्यक्तित्व के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 के अनुसार, विज्ञान शिक्षा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक उपयुक्त है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पुनर्बलन अनुसूचियां' (Schedules of Reinforcement—विशेष रूप से 'चर-अनुपात अनुसूची' अर्थात् Variable-Ratio Schedule) तथा 'आकार देना' (Shaping) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वांछित व्यवहार के स्थायित्व, विलोपन (Extinction) के प्रतिरोध, और जटिल नवीन कौशलों के क्रमिक अर्जन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory) अथवा 'प्रतीक-gestalt अधिगम' के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवगत मानचित्र या संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पर्यावरण और अनुभवों के आधार पर केवल यांत्रिक आदतों या अनुक्रियाओं को ही नहीं सीखता, बल्कि मस्तिष्क में अपने परिवेश का एक मानसिक स्थानिक लेआउट (Spatial Mental Representation) तैयार करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक संज्ञान, लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार और आंतरिक रूप से प्रेरित अन्वेषण कौशल के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बालक वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से व्यक्त करने के लिए शब्दों, भाषा, गणितीय प्रतीकों और अमूर्त संकेतों का उपयोग करना सीख जाता है, जहाँ भौतिक वस्तुओं या प्रत्यक्ष चित्रों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं रहती—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक भाषा-कौशल और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक संरचना के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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