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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की उस महत्वपूर्ण विशेषता के संबंध में—जिसके तहत किशोर बालक बिना किसी मूर्त या प्रत्यक्ष सामग्री पर निर्भर रहे केवल शुद्ध तार्किक प्रस्तावों, परिकल्पनाओं (Hypotheses) और अमूर्त विचारों के आधार पर समस्याओं का समाधान करता है और वैज्ञानिक पद्धति से सोचता है, जिसे 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) कहा जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय तार्किक विश्लेषण, बौद्धिक स्वायत्तता और अमूर्त चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की अंतिम अवस्था (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) कहलाती है। इस चरण की सबसे प्रमुख वैज्ञानिक विशेषता 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) है, जिसके अंतर्गत किशोर न केवल मूर्त साक्ष्यों पर विचार करता है, बल्कि वह किसी समस्या के समाधान के लिए विभिन्न परिकल्पनाएं (Hypotheses) निर्मित करता है, तार्किक रूप से उनके परिणामों की deductive जांच करता है और वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Methodology) की तरह विचार करता है। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक और प्रामाणिक रूप से व्यक्त करता है, जबकि अन्य विकल्प इस अवस्था से मेल नहीं खाते।
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