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Indian Polity
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भारतीय संविधान में 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) किस देश के संविधान से ली गई है?

Detailed Explanation

समवर्ती सूची की अवधारणा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से प्रेरित है।
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→ भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता, उनके अधिकार क्षेत्र तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाले सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधीक्षण शक्ति केवल प्रशासनिक मामलों तक सीमित है, न्यायिक निर्णयों की समीक्षा या पुनरीक्षण के लिए इस शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात् की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए कम से कम सात वर्ष का अधिवक्ता या प्लीडर के रूप में अनुभव होना और संघ या राज्य की सेवा में पहले से सेवारत न होना आवश्यक है। 3. संविधान के अनुच्छेद 236 के निर्वचन और अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के अधीनस्थ न्यायपालिका पर नियंत्रण की शक्ति, जिसमें जिला न्यायालयों से नीचे के न्यायिक सेवा के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी से जुड़े प्रशासनिक मामले शामिल हैं, पूर्ण रूप से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होती है, न कि राज्य के राज्यपाल के पास। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → किस अनुच्छेद को संविधान की 'हृदय और आत्मा' कहा गया? → भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान है, तथा मूल संविधान में यह व्यवस्था थी कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय होगा जिसे वर्ष 1950 में ही लागू कर दिया गया था। 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी संस्तुति देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली (जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों) की सिफारिश की थी, साथ ही सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के उपाय सुझाए थे। 3. निर्वाचन आयोग के किसी भी निर्णय के विरुद्ध, यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेद उत्पन्न हो जाता है, तो निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास कोई वीटो पावर नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के गठन, वित्तीय शक्तियों और उनके संरचनात्मक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या बीस लाख से अधिक नहीं है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने की छूट दी गई है। 2. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर और तत्पश्चात हर पाँच वर्ष की समाप्ति पर, पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए एक वित्त आयोग का गठन करेगा। 3. अनुच्छेद 243-D के अंतर्गत पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल सीटों के कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जानी अनिवार्य हैं, और यह आरक्षण अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की कुल संख्या पर भी लागू होता है, साथ ही कुछ राज्यों ने इसे बढ़ाकर 50% कर दिया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 69 के अनुसार प्रत्येक उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा, तथा उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य भाग नहीं लेते हैं। 2. अनुच्छेद 75(3) के प्रावधानों के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, और इस सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत का अर्थ यह है कि लोकसभा में प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, तथा कोई भी मंत्री व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर रहता है। 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे तथा राष्ट्रपति द्वारा माँगी गई प्रशासनिक और विधायी मामलों की सूचनाएँ प्रदान करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय पर मंत्रिपरिषद के विचारार्थ प्रस्तुत करने को कहे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो प्रधानमंत्री ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं है।
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