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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अहंता पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion - किशोरावस्था) की अवस्था के दौरान प्रकट होने वाली 'मनोसामाजिक संकट' (Psychosocial Crisis) की अवधारणा—जिसके तहत किशोर बालक अपने आत्म-मूल्यों, विश्वासों, भविष्य के करियर और लिंग-भूमिका को लेकर गहन आत्म-चिंतन करता है और यदि वह एक सुसंगत पहचान विकसित करने में विफल रहता है, तो उसे गंभीर भूमिका संभ्रम या पहचान संकट का सामना करना पड़ता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत संवीक्षा, स्व-संकल्पना (Self-Concept) और मनोवैज्ञानिक समायोजन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धांत के अनुसार, किशोरावस्था (लगभग 12 से 18 वर्ष) 'अहंता पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion) का काल होती है। इस चरण में युवा अपने अस्तित्व, मूल्यों, भविष्य के लक्ष्यों और भूमिकाओं की खोज करते हैं। एक शिक्षक का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को सुरक्षित और लोकतांत्रिक वातावरण प्रदान करे, जिससे वे बिना किसी भय के अपनी पहचान को सुदृढ़ कर सकें और भूमिका संभ्रम से उबर सकें। इसलिए विकल्प (b) वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से सबसे सही कथन है।
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