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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता या स्व-दक्षता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत किसी विशिष्ट कार्य या परिस्थिति में सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति की अपनी क्षमताओं और कौशल पर उसका व्यक्तिगत विश्वास और आकलन शामिल होता है, जो उसके प्रयासों के स्तर, दृढ़ता और चुनौतियों के सामने उसकी सहनशीलता को प्रत्यक्ष रूप से निर्धारित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणादायक नियमन, लक्ष्य निर्धारण और शैक्षणिक निष्पत्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत में 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) शिक्षार्थी की उस व्यक्तिगत मान्यता को दर्शाती है जिसके अनुसार वह किसी विशिष्ट कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम है। उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले छात्र जटिल चुनौतियों से भागते नहीं बल्कि उन्हें हल करने के लिए अधिक प्रयास करते हैं और असफल होने पर भी हार नहीं मानते। इसके विपरीत, विकल्प b गलत है क्योंकि यह परिवर्तनशील है; विकल्प c आंशिक रूप से Attribution Theory से संबंधित है और यहाँ प्रभावकारिता का सटीक मनोवैज्ञानिक लाभ विकल्प a में वर्णित है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंटगोमेरी मूक (Norman L. Munn) एवं जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम शैलियों' (Learning Styles) तथा डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित चार प्रमुख अधिगम शैलियों—अभिसारी (Converging), अपसारी (Diverging), आत्मसात्कारी (Assimilating), और समायोजक (Accommodating)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक विविधताओं, अनुभव-आधारित संकल्पनाओं, और समस्या-समाधान रणनीतियों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित **'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD)** और **'चान्द्रण या मचान निर्माण' (Scaffolding)** की अवधारणा—जिसके तहत वास्तविक विकासात्मक स्तर (जो स्वतंत्र रूप से समस्या समाधान द्वारा निर्धारित होता है) और संभावित विकासात्मक स्तर (जो वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य (MKO) के मार्गदर्शन या सहयोग से प्राप्त किया जाता है) के बीच के अंतराल को अस्थायी और संवेदनशीलता से भरे समर्थन द्वारा पाटा जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्फुटित संज्ञानात्मक विकास, सहयोगात्मक समस्या-समाधान और आंतरिक भाषण (Inner Speech) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धिमत्ता सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतःवैयक्तिक बुद्धिमत्ता' (Intrapersonal Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपनी स्वयं की भावनाओं, प्रेरणाओं, आंतरिक अनुभूतियों, सीमाओं और शक्तियों को गहराई से समझने, उनका सटीक आकलन करने और अपने व्यवहार को तदनुरूप विनियमित करने में अत्यधिक दक्ष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), metacognition (अधि-संज्ञानात्मक) क्षमताओं और आत्म-प्रतिबिंब (Self-Reflection) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम' के दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रतिपादित **'चिंतनशील चिंतन की पाँच अवस्थाएँ' (Five Phases of Reflective Thinking)** में से एक प्रमुख चरण—**'समस्या का बौद्धिकरण या बौद्धिक परिकल्पना निर्माण' (Intellectualization of the Problem into a Hypothesis)**—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी अचानक उत्पन्न हुई कक्षा-कक्षीय बाधा या भ्रमित करने वाली उलझन को एक स्पष्ट, सुसंगत और परीक्षण योग्य समस्या में रूपांतरित करता है और संभावित समाधानों के रूप में परिकल्पनाएँ गढ़ता है, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक विश्लेषण और स्व-निर्देशित ज्ञान-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित **'पा R scaffolding' (मचान या ढांचा निर्माण)** की अवधारणा—जिसके तहत एक अधिक ज्ञ knowledgeable अन्य (MKO) द्वारा शिक्षार्थी को उसकी वर्तमान क्षमता से आगे ले जाने के लिए दी जाने वाली अस्थायी, संरचित और संवादात्मक सहायता को संदर्भित किया जाता है, जिसे जैसे-जैसे शिक्षार्थी की स्वायत्तता बढ़ती है, धीरे-धीरे कम या समाप्त कर दिया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संभावित विकास के क्षेत्र (ZPD), संज्ञानात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक-सहयोगात्मक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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