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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन फ्लैवेल (John Flavell) के 'मेटाकॉग्निशन या अधिविज्ञान' (Metacognition) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'अधिविज्ञानात्मक ज्ञान' (Metacognitive Knowledge) और 'अधिविज्ञानात्मक विनियमन' (Metacognitive Regulation) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने स्वयं के संज्ञानात्मक प्रक्रमों (जैसे- सोचना, समझना, याद रखना) के बारे में ज्ञान रखता है तथा अपनी सीखने की रणनीतियों की योजना बनाना, उनकी निगरानी करना और उनका मूल्यांकन करना सीखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त अधिगम (Autonomous Learning), रणनीतिक चिंतन और आत्म-विनियमित शिक्षण (Self-Regulated Learning) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के दृष्टिकोण से जॉन फ्लैवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित 'अधिविज्ञान' (Metacognition) अर्थात 'ज्ञान के बारे में ज्ञान' या 'चिंतन के बारे में चिंतन' एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक अवधारणा है। अधिविज्ञान के दो मुख्य आयाम हैं: अधिविज्ञानात्मक ज्ञान (अपने और दूसरों के संज्ञानात्मक प्रक्रमों की समझ) और अधिविज्ञानात्मक विनियमन (अपने अधिगम को निर्देशित करने के लिए योजना बनाना, निगरानी करना और उसका मूल्यांकन करना)। विकल्प (b) इस अवधारणा के वैज्ञानिक और कक्षा-कक्षीय निहितार्थ को पूर्ण रूप से स्पष्ट करता है क्योंकि जब छात्र अपनी सीखने की प्रक्रिया को खुद विनियमित (Self-regulate) करना सीख जाते हैं, तो वे अधिक स्वायत्त, प्रभावी और दक्ष अधिगमकर्ता बनते हैं। अन्य विकल्प तथ्यात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से त्रुटिपूर्ण हैं।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय—**'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement)**—जिसे उस प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ किसी अवांछित या कष्टदायक उद्दीपक (Aversive Stimulus) को हटाकर या रोककर किसी वांछित अनुक्रिया या व्यवहार की आवृत्ति, संभावना और दर को बढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकूली व्यवहारों के संवर्धन, प्रेरणा प्रबंधन और तनाव मुक्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'पारस्परिक determinism' (Reciprocal Determinism/त्रिपक्षीय पारस्परिक निर्धारण) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्तिगत कारक (Cognitive/Personal factors), व्यवहार (Behavior), और पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental influences) एक-दूसरे को लगातार प्रभावित करते हैं—तथा 'अवलोकनयात्मक अधिगम' के चार घटकों (ध्यान, धारणा, पुनरुत्पादन और अभिप्रेरणा) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), अनुकरण और उच्च-स्तरीय सामाजिक-संज्ञानात्मक विकास के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आंशिक सुदृढ़ीकरण अनुसूची' (Partial / Intermittent Reinforcement Schedule)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ प्रत्येक सही अनुक्रिया पर सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) देने के बजाय निश्चित या अनिश्चित समय अंतरालों या प्रतिक्रियाओं के बाद रुक-रुक कर सुदृढ़ीकरण प्रदान किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यवहार के स्थायित्व, विलुप्तिकरण के प्रति प्रतिरोध (Resistance to Extinction) और आंतरिक अभिप्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अहंता पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion - किशोरावस्था) की अवस्था के दौरान प्रकट होने वाली 'मनोसामाजिक संकट' (Psychosocial Crisis) की अवधारणा—जिसके तहत किशोर बालक अपने आत्म-मूल्यों, विश्वासों, भविष्य के करियर और लिंग-भूमिका को लेकर गहन आत्म-चिंतन करता है और यदि वह एक सुसंगत पहचान विकसित करने में विफल रहता है, तो उसे गंभीर भूमिका संभ्रम या पहचान संकट का सामना करना पड़ता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत संवीक्षा, स्व-संकल्पना (Self-Concept) और मनोवैज्ञानिक समायोजन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय व्यक्तित्व संरचनात्मक संप्रत्यय—**'अहम (Ego)'**—जिसे उस वास्तविकता-प्रेरित और तर्कसंगत मानसिक घटक के रूप में परिभाषित किया जाता है जो 'इदम (Id)' की पाशविक और तात्कालिक इच्छाओं तथा 'पराहम (Superego)' के कठोर नैतिक आदर्शों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए यथार्थ के धरातल पर व्यावहारिक निर्णय लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आवेग नियंत्रण (Impulse Control), समायोजन तंत्र (Adjustment Mechanisms) और निर्णय लेने की क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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