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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'खोज अधिगम या अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी को पूर्व-निर्मित या पकी-पकाई जानकारी देने के बजाय उसे ऐसी समस्यामूलक और संरचित परिस्थितियाँ प्रदान की जाती हैं जहाँ वह अपनी जिज्ञासा, प्रेक्षण और तार्किक प्रयोगों के माध्यम से स्वयं नियमों, सिद्धांतों और ज्ञान का अन्वेषण एवं निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक संज्ञान, तार्किक स्वायत्तता और अमूर्त चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के खोज अधिगम (Discovery Learning) सिद्धांत के अनुसार, जब छात्र स्वयं प्रयोग, जिज्ञासा और अन्वेषण के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करते हैं, तो उनका संज्ञानात्मक विकास अधिक प्रभावी होता है। यह विधि उन्हें निष्क्रिय ग्रहणकर्ता के बजाय सक्रिय ज्ञान-निर्माता बनाती है, जिससे उनकी आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) और तार्किक स्वायत्तता में वृद्धि होती है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'प्रायोगिक या अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning)** की अवधारणा—जिसके तहत अधिगम तब होता है जब छात्र अपनी व्यक्तिगत जिज्ञासा, स्व-प्रेरणा और प्रत्यक्ष अनुभवों को शैक्षिक प्रक्रिया में शामिल करते हैं तथा शिक्षक एक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) की भूमिका निभाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विकास, आत्म-वास्तविक olization (Self-Actualization) और सार्थक आंतरिक परिवर्तन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अनुभवात्मक या अनुभवाश्रित अधिगम' (Experiential Learning) की अवधारणा—जिसके तहत सार्थक अधिगम को बौद्धिक ज्ञान के संचयन से अधिक व्यक्तिगत जुड़ाव, स्व-आरंभिक (Self-initiated), संपूर्ण व्यक्तित्व की भागीदारी और शिक्षार्थी की उन भावनाओं व इच्छाओं से जोड़ा जाता है जो उसके दैनिक जीवन के अनुभवों को रूपांतरित करती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त विकास, आत्म-बोध (Self-actualization) और सार्थक आंतरिक अभिप्रेरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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