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Indian Polity
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राज्यसभा को 'स्थायी सदन' (Permanent House) क्यों कहा जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता (लोकसभा के विपरीत)।
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों (चार्टर अधिनियमों और परिषद् अधिनियमों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्टर अधिनियम, 1853 के माध्यम से पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को पृथक किया गया, और इसके तहत एक अलग 'भारतीय केंद्रीय विधान परिषद' (Indian Legislative Council) की स्थापना की गई जिसे 'लहिया विधान परिषद' भी कहा गया, जिसमें छह नए पार्षदों में से स्थानीय प्रतिनिधित्व के तहत मद्रास, बंबई, बंगाल और आगरा की प्रांतीय सरकारों से चार सदस्यों का चुनाव किया गया था।
2. भारत परिषद अधिनियम, 1861 द्वारा गवर्नर-जनरल की कार्यकारी परिषद में विधायी कार्यों के विस्तार के लिए सदस्यों की संख्या कम से कम 6 और अधिकतम 12 तय की गई, और इसी अधिनियम के तहत लॉर्ड कैनिंग द्वारा शुरू की गई 'पोर्टफोलियो प्रणाली' (Portfolio System) को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई।
3. भारत परिषद अधिनियम, 1892 के द्वारा केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में अतिरिक्त (गैर-सरकारी) सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई तथा पहली बार विधान परिषदों के सदस्यों को बजट पर बहस करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया, किंतु इसके अंतर्गत पूरक प्रश्न पूछने (Supplementary Questions) और मतदान करने का अधिकार अभी भी प्रदान नहीं किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) को संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को अंगीकृत किया गया था, जो आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को वर्ष 1917 की रूसी क्रांति (Russian Revolution) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके माध्यम से संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके न्यायिक प्रवर्तन तथा संवैधानिक संशोधन संबंधी प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये तत्व किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इनके उल्लंघन पर किसी भी न्यायालय में वाद दायर नहीं किया जा सकता है।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए निर्देश जोड़े गए, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (अनुच्छेद 39-क), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43-क) तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48-क) शामिल हैं।
3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में एक नया खंड जोड़ा गया जिसके तहत राज्य को विशेष रूप से यह निर्देश दिया गया कि वह आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम से कम करे, और न केवल व्यक्तियों के बीच बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे हुए समूहों के बीच भी असमानताओं को समाप्त करने का प्रयास करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के प्रावधानों और उससे संबंधित संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत अनुच्छेद 243-ख में यह उपबंध किया गया है कि प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तरों पर पंचायतों का गठन किया जाएगा, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या बीस लाख से अधिक नहीं है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने की छूट दी गई है।
2. संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्वों से संबंधित कुल 25 विषयों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जिसमें कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई, और खादी तथा कुटीर उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
3. प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले कुल स्थानों में से कम-से-कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे, और यह आरक्षण अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के संदर्भ में भी लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का अधिकार किसको है?
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