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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'अवलोकनारात्मक अधिगम एवं प्रतिरूपण' (Observational Learning and Modeling)** की अवधारणा—जिसके तहत बालक अपने परिवेश में मौजूद आदर्शों या मॉडल्स (जैसे माता-पिता, शिक्षक या मीडिया नायक) के व्यवहार का सूक्ष्म अवलोकन करके, उसे याद रखकर, मोटर क्षमताओं के माध्यम से पुनरुत्पादित करके और प्रेरणा प्राप्त करके नए व्यवहारों को बिना प्रत्यक्ष पुनर्बलन के स्वतः सीख जाते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक-नैतिक विकास, स्व-प्रभावकारिता (Self-Efficacy) के सृजन और सकारात्मक आदतों के निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा का 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) यह स्पष्ट करता है कि मनुष्य अपने सामाजिक पर्यावरण में अन्य व्यक्तियों (मॉडल्स) के व्यवहार का अवलोकन करके प्रत्यक्ष पुनर्बलन के बिना भी सीख सकता है। बंडूरा के अनुसार इस अवलोकनारात्मक अधिगम में चार मुख्य प्रक्रियाएं कार्य करती हैं: ध्यान (Attention), अवधारण (Retention), मोटर पुनरुत्पादन (Motor Reproduction), और अभिप्रेरण/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)। यह सिद्धांत बच्चों में 'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) को विकसित करने और कक्षा में एक सकारात्मक, अनुकरणीय शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
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