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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न-गेस्टाल्ट अधिगम सिद्धांत' (Sign-Gestalt Learning Theory / Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित **'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)** की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पर्यावरण या अधिगम परिवेश में विभिन्न संकेतों, रास्तों और लक्ष्यों के बीच के स्थानिक और तार्किक संबंधों का एक मानसिक आंतरिक खाका या नक्शा तैयार करता है, जिससे वह केवल यांत्रिक आदतों या प्रतिक्रियाओं के बजाय उद्देश्यपूर्ण ढंग से नेविगेट करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक बोध, आंतरिक अभिप्रेरण और लक्ष्य-निर्देशित समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) का 'चिह्न-गेस्टाल्ट अधिगम सिद्धांत' या प्रयोजनवादी व्यवहारवाद (Purposive Behaviorism) यह मानता है कि प्राणी (मानव या पशु) केवल यांत्रिक S-R (उद्दीपक-अनुक्रिया) आचरण नहीं करते, बल्कि पर्यावरण के 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map) का निर्माण करते हैं। इस सिद्धांत के तहत 'सुप्त अधिगम' (Latent Learning) की अवधारणा भी महत्वपूर्ण है, जो यह दर्शाती है कि अधिगम बिना तत्काल सुदृढ़ीकरण के भी हो सकता है और आंतरिक मानसिक अभ्यासों द्वारा निर्देशित होता है। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा के वैज्ञानिक और कक्षा-कक्षीय निहितार्थ को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalist Intelligence) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति में प्राकृतिक दुनिया (जैसे पेड़-पौधे, जीव-जंतु, पारिस्थितिकी तंत्र, मौसम के पैटर्न और भूवैज्ञानिक संरचनाओं) की सूक्ष्म और सटीक पहचान करने, उनका वर्गीकरण करने तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की उच्च कोटि की क्षमता पाई जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पर्यावरणीय संवेदनशीलता, अनुभवात्मक ज्ञानार्जन और तार्किक अवलोकन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा यह मानसिक रूप से समझने में सक्षम हो जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, रंग या विन्यास (Appearance) में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या संख्या अपरिवर्तित रहती है (उदाहरणार्थ, एक ही मात्रा के पानी को लंबे और चौड़े बर्तन में अलग-अलग डालने पर पानी की मात्रा समान रहना)—जो कि मुख्य रूप से संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था (Stage) की एक प्रमुख तार्किक विशेषता है और इसके कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक संचालन के संबंध में कौन सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' (Sociocultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) की अवधारणा के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई 'चान्स्कियन' (Chomskyan) या सामाजिक-भाषाई अंतःक्रिया के परिप्रेक्ष्य में 'मचान या पाड़ बाँधना' (Scaffolding - जिसे बाद में जेरोम ब्रूनर द्वारा विस्तारित किया गया) की प्रक्रिया—जिसके तहत एक अधिक जानकार अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) द्वारा शिक्षार्थी को उसकी वास्तविक विकासात्मक सीमा से उच्च बौद्धिक स्तर तक पहुँचाने के लिए दी जाने वाली अस्थायी, संरचित और क्रमिक रूप से घटाई जाने वाली सहायता (Temporary Instructional Support) है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक संज्ञान (Collaborative Cognition), आंतरिक भाषण (Inner Speech) के विकास, और स्व-नियमन (Self-Regulation) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) तथा 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) की पाँच चरणों की प्रक्रिया—(1) कठिनाई की अनुभूति, (2) समस्या का स्थान निर्धारण और उसका परिभाषाकरण, (3) संभावित समाधानों या परिकल्पनाओं का निर्माण, (4) परिकल्पनाओं के परिणामों का मानसिक परीक्षण (तर्क), और (5) परिकल्पनाओं का प्रयोगात्मक सत्यापन—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समस्या-समाधान क्षमताओं, अनुभवात्मक लोकतन्त्र, और आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकन आत्मक अधिगम' (Observational Learning) की चार अंतर्संबंधित प्रक्रियाओं—(1) अवधान (Attention), (2) धारण (Retention), (3) पुनरुत्पादन (Reproduction), और (4) अभिप्रेरण/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)—तथा 'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'प्रतिरूपण' (Modeling), सकारात्मक व्यवहार के अर्जन और उनके आंतरिक स्वायत्त नियमन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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