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Indian Polity
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'धन विधेयक' के संबंध में विशेष प्रक्रिया का वर्णन करता है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 109 धन विधेयक के संबंध में लोकसभा की विशेष शक्तियों और प्रक्रिया का वर्णन करता है।
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→ भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनसे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39A में 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' (Equal Justice and Free Legal Aid) का प्रावधान किया गया है, जिसे मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था। 2. अनुच्छेद 43B के अनुसार राज्य, सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा, और इस अनुच्छेद को 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में जोड़ा गया था। 3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत उल्लिखित पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा से संबंधित प्रावधान मूल संविधान के अनुच्छेद 48 में ही निहित थे, जिन्हें किसी भी संवैधानिक संशोधन द्वारा परिवर्तित नहीं किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → संविधान का कौन सा संशोधन 'मिनी कॉन्स्टिट्यूशन' कहलाता है? → भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और इसके ऐतिहासिक विकास तथा न्यायिक व्याख्याओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना। 2. वर्ष 1960 के 'बेरूबारी यूनियन वाद' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग नहीं है, इसलिए इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं किया जा सकता है। 3. वर्ष 1973 के ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती वाद' में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक भाग है, और इसमें संसद द्वारा संशोधन किया जा सकता है बशर्ते इसके 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न हो। 4. प्रस्तावना में अब तक कुल दो बार संशोधन किया जा चुका है - पहला 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा तथा दूसरा 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India - CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, अधिकारों तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन के लिए भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में audiencia (सुनवाई) का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठक में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे किसी भी परिस्थिति में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पद ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवस्था पर आधारित है, किंतु भारतीय CAG और ब्रिटिश CAG में मूलभूत अंतर यह है कि ब्रिटेन में CAG के प्राधिकरण के बिना लोकनिधि (Public Exchequer) से एक भी रुपया बाहर नहीं निकाला जा सकता (अर्थात वह संवितरण पर नियंत्रण रखता है), जबकि भारत में CAG का मुख्य कार्य लेखापरीक्षण (Audit) करना है, संवितरण पर पूर्व नियंत्रण रखना नहीं। 3. अनुच्छेद 148 के अनुसार CAG को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं ग्राउंड्स पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु CAG अपना पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद पर दोबारा नियुक्त होने के लिए पात्र (Eligible) होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोक हित में यह प्रतीत हो कि अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना से राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करने, उन पर विचार करने तथा कुछ विशेष विषयों पर सामान्य चर्चा करने में सहायता मिलेगी, तो वह इस परिषद् की स्थापना कर सकता है, और इस परिषद् के निर्णय सभी संबंधित राज्यों पर संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होते हैं। 2. वर्ष 1990 में सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से एक स्थायी अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। 3. संविधान के अनुच्छेद 280 के प्रावधानों के अंतर्गत गठित 'वित्त आयोग' (Finance Commission) एक अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली सहायता अनुदान (Grants-in-aid) के सिद्धांतों की अनुशंसा करता है, किंतु इसकी सिफारिशें केंद्र सरकार के लिए केवल परामर्शदात्री (Advisory) प्रकृति की होती हैं, न कि बाध्यकारी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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