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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'पारस्परिकता का त्रिकीय मॉडल या पारस्परिक निर्धारकता' (Triadic Reciprocal Causation / Reciprocal Determinism)** की अवधारणा—जिसके तहत मानवीय कार्यप्रणाली और व्यवहार को तीन अंतर्संबंधित कारकों—(1) व्यक्तिगत संज्ञानात्मक व जैविक कारक (Cognitive/Personal Factors), (2) व्यवहारिक कारक (Behavioral Factors), और (3) पर्यावरणीय कारक (Environmental Factors)—के बीच एक निरंतर, द्विदिशात्मक (Bidirectional) और गत्यात्मक अंतःक्रिया के परिणाम के रूप में समझा जाता है, जहाँ इनमें से प्रत्येक घटक अन्य दोनों को प्रभावित भी करता है और उनसे प्रभावित भी होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), प्रेक्षणात्मक अधिगम और समग्र मनोवैज्ञानिक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत में 'पारस्परिक निर्धारकता' (Triadic Reciprocal Causation) यह मानती है कि मानव का विकास और व्यवहार किसी एक कारक (न तो केवल पर्यावरण और न ही केवल आंतरिक संज्ञान) का परिणाम नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत कारक (संज्ञानात्मक, भावनात्मक, जैविक), व्यवहार और पर्यावरण—ये तीनों घटक एक गत्यात्मक त्रिकोण के रूप में एक-दूसरे को लगातार प्रभावित करते हैं। कक्षा-कक्षीय परिप्रेक्ष्य में इसका अर्थ यह है कि शिक्षक को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक ऐसा अनुकूल सामाजिक-पर्यावरणीय ढांचा प्रदान करना चाहिए जो उनके सकारात्मक संज्ञान और स्व-नियमन क्षमताओं को बढ़ावा दे सके।
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