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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' यानी 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत सर्वोच्च शिखर पर प्रतिपादित **'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)** की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी संपूर्ण आंतरिक क्षमताओं, योग्यताओं, रचनात्मकता और असीम संभावनाओं का पूर्ण विकास और सदुपयोग करते हुए उस सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त कर लेता है जो वह बनने की वास्तविक क्षमता रखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक विकास, स्व-निर्देशित अधिगम और समग्र मानवीय उत्कृष्टता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
अब्राहम मास्लो के आवश्यकताओं के पदानुक्रम सिद्धांत के अनुसार, मनुष्य की आवश्यकताएं एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित होती हैं—शारीरिक आवश्यकताएं, सुरक्षा आवश्यकताएं, अपनेपन और प्रेम की आवश्यकताएं, सम्मान की आवश्यकताएं, और सबसे ऊपर 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization)। मास्लो का यह स्पष्ट मनोवैज्ञानिक मत है कि जब तक आधारभूत और न्यून-स्तरीय आवश्यकताएं संतुष्ट नहीं होतीं, तब तक व्यक्ति अपनी उच्च-स्तरीय क्षमताओं और आत्म-सिद्धि के लक्ष्य की ओर पूरी तरह अग्रसर नहीं हो सकता। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में शिक्षक का यह दायित्व है कि वह विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित, स्वीकृत और संवेगात्मक रूप से तनावमुक्त वातावरण का निर्माण करे ताकि वे अपनी सर्वोच्च रचनात्मक और बौद्धिक क्षमताओं (आत्म-सिद्धि) का विकास कर सकें।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित मुख्य नियमों में से एक—**'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)**—जिसके तहत किसी अनुक्रिया के पश्चात यदि संतोषजनक या सुखद परिणाम प्राप्त होते हैं, तो उस उद्दीपक और अनुक्रिया (S-R Bond) के बीच का संबंध मजबूत हो जाता है, और यदि असंतोषजनक या कष्टदायक परिणाम प्राप्त होते हैं, तो वह संबंध कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संतोषजनक अधिगम अनुभवों, सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) और प्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के दौरान विकसित होने वाले मुख्य संज्ञानात्मक कौशलों—(1) परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning), (2) अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), और (3) आनुपातिक एवं combinatorial तर्क—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच, बहु-आयामी समस्या-समाधान, और उच्च-स्तरीय तार्किक प्रणालियों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान विकसित होने वाली प्रमुख संज्ञानात्मक क्षमता —'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)— की अवधारणा, जिसके तहत बालक यह भली-भांति समझ जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या विन्यास में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या भार अपरिवर्तित (Constant) रहते हैं, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विन्यास, विकेंद्रीकरण (Decentration) और मानसिक संचालनों (Mental Operations) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकन आत्मक अधिगम' (Observational Learning) के चार प्रमुख घटकों—(1) अवधान (Attention), (2) धारण (Retention), (3) पुनरुत्पादन (Reproduction), और (4) अभिप्रेरण/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)—तथा 'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकरण, मॉडलिंग के प्रभावों, और स्व-नियमित अधिगम (Self-Regulated Learning) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' (Sociocultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) की अवधारणा—जिसके तहत वास्तविक विकासात्मक स्तर (जो स्वतंत्र रूप से समस्या समाधान द्वारा निर्धारित होता है) और संभावित विकासात्मक स्तर (जो वयस्क मार्गदर्शन या अधिक सक्षम साथियों के सहयोग से समस्या समाधान द्वारा निर्धारित होता है) के बीच के अंतर को स्पष्ट किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मचान निर्माण (Scaffolding), सहयोगात्मक समस्या समाधान और संज्ञानात्मक विस्तार के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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