BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
1 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'लग्नता या संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'असुरक्षित-प्रतिरोधी / उभयभावी संलग्नता' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment)**—जिसके तहत शिशु अपनी प्राथमिक देखभाल करने वाले (माता-पिता) के प्रति अत्यधिक निकटता और आसक्ति तो प्रदर्शित करता है, परंतु जब देखभाल करने वाला व्यक्ति वापस लौटता है, तो शिशु एक ही समय में उससे चिपकने और अत्यधिक क्रोध या विरोध (Resistance) प्रकट करने की मिश्रित एवं विरोधाभासी प्रतिक्रिया देता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), विद्यालयी समायोजन और अनिश्चितता के प्रति सहिष्णुता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जॉन बॉल्बी के संलग्नता सिद्धांत (Attachment Theory) के अनुसार, 'असुरक्षित-प्रतिरोधी या उभयभावी संलग्नता' (Insecure-Resistant Attachment) वाले बच्चों में माता-पिता की अनुनय-विनय और असंगत अनुक्रियाओं के कारण अत्यधिक संवेगात्मक अनिश्चितता पाई जाती है। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में ऐसे विद्यार्थी अत्यधिक आशंकित, बात-बात पर ध्यान आकर्षित करने वाले और संवेगात्मक रूप से अस्थिर हो सकते हैं। शिक्षक के रूप में ऐसे विद्यार्थियों को एक सुरक्षित, पूर्वानुमानित (predictable), और सहानुभूतिपूर्ण वातावरण प्रदान करना आवश्यक होता है ताकि उनका संवेगात्मक नियमन बेहतर हो सके। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'आवश्यकताओं का पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) तथा 'सौंदर्यशास्त्रीय और ज्ञानात्मक आवश्यकताएं' (Aesthetic and Cognitive Needs) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की उच्च-स्तरीय प्रेरणा, आंतरिक जिज्ञासा (Intrinsic Curiosity), और मानवीय पोटेंशियल के पूर्ण विकास के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत किसी विशिष्ट कार्य को सफलताપूर्वक निष्पादित करने की अपनी क्षमता के बारे में व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास उसके लक्ष्यों के निर्धारण, प्रयास के स्तर और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता को प्रत्यक्ष रूप से संचालित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, संज्ञानात्मक पुनर्रचना और स्वनिर्देशित अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों—(1) 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) तथा (2) 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वनिर्मित नैतिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सहभागिता, न्यायसंगत चिंतन, और अन्यायपूर्ण सामाजिक कानूनों के विरुद्ध अहिंसक सविनय अवज्ञा के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत उत्तर-पारंपरिक नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality) के दूसरे चरण—अर्थात् 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation / Stage 6)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव, कानून या दंड के भय से परे जाकर अपने स्व-चयित आंतरिक सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, समानता और मानवीय गरिमा) के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे नियम सामाजिक कानूनों के विपरीत क्यों न हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय नैतिक विवेक, तार्किक स्वायत्तता और मूल्य-आधारित चरित्र निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, उरी ब्रॉन्फेनब्रेनर (Urie Bronfenbrenner) के 'पारिस्थितिकी प्रणालियों के सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'मेसोसिस्टम' (Mesosystem)** की अवधारणा—जिसके तहत बालक के विभिन्न सूक्ष्म तंत्रों (Microsystems जैसे परिवार, विद्यालय, सहपाठी समूह और पड़ोस) के बीच होने वाले आपसी संबंधों, अंतःक्रियाओं और संपर्कों का एक अंतर्संबंधित नेटवर्क शामिल होता है, जो बालक के संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को अत्यधिक प्रभावित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र समायोजन, सहयोगात्मक गृह-विद्यालय साझेदारी और बहुआयामी विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.