BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
1 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संज्ञानात्मक अवधारणा—**'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizer)**—जिसे किसी नवीन और जटिल विषयवस्तु को पढ़ाने से पहले प्रस्तुत की जाने वाली एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त अवधारणात्मक रूपरेखा के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो शिक्षार्थी की दीर्घकालिक स्मृति में पहले से मौजूद प्रासंगिक ज्ञान (Prior Knowledge / Cognitive Structure) और नई आने वाली सूचनाओं के बीच एक वैचारिक सेतु का कार्य करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सार्थक ज्ञान निर्माण (Meaningful Knowledge Construction), संज्ञानात्मक समावेशन (Subsumption) और दीर्घकालिक सूचना प्रतिधारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

डेविड औसुबेल के सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत (Meaningful Verbal Learning Theory) में 'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizer) एक अत्यंत केंद्रीय अवधारणा है। यह शिक्षण से पहले प्रस्तुत की जाने वाली परिचयात्मक सामग्री है जो शिक्षार्थी के पूर्व ज्ञान (Prior Knowledge) को सक्रिय करती है। यह नए ज्ञान को मौजूदा संज्ञानात्मक ढांचे से जोड़ने के लिए 'समावेशन' (Subsumption) प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाती है, जहाँ विद्यार्थी यांत्रिक रूप से रटने के बजाय अर्थपूर्ण और दीर्घकालिक ज्ञान का निर्माण करते हैं। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा के वैज्ञानिक और शैक्षणिक निहितार्थों को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory of Personality) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की संरचना के तीन प्रमुख घटकों—**इदम (Id), अहम् (Ego), और पराहम् (Superego)**—में से 'अहम्' (Ego) की उस केंद्रीय नियामक भूमिका की अवधारणा, जो 'इदम' की पाशविक और तात्कालिक सुख-प्राप्ति की प्राथमिक इच्छाओं तथा 'पर्राहम्' के कठोर, नैतिक और आदर्शवादी दबावों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए **'वास्तविकता के सिद्धांत' (Reality Principle)** के आधार पर मध्यस्थता करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन, संघर्ष समाधान और मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधवाद सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मुख्य नियम—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ जब कोई तंत्रिका पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को संतुष्टि मिलती है और यदि उसे तैयार होने पर भी कार्य करने से रोका जाता है, तो इससे उसे झुंझलाहट या असंतोष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, अभिप्रेरणा और अधिगम पठार (Learning Plateau) के निवारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अन्तर्व्यक्तिगत बुद्धि' (Interpersonal Intelligence) की अवधारणा—जिसके तहत अन्य व्यक्तियों की भावनाओं, इच्छाओं, प्रेरणाओं, मनोदशाओं और उनके इरादों को सूक्ष्मता से समझने, उनका सटीक मूल्यांकन करने और उनके साथ प्रभावी ढंग से संवाद एवं संबंध स्थापित करने की उच्च-स्तरीय क्षमता शामिल होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक अधिगम, सामाजिक कौशल और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च और अंतिम अधिगम प्रकार—**'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)**—जिसे उस उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और कौशलों का उपयोग करते हुए किसी नवीन, जटिल और अप्रत्याशित समस्या का तार्किक, विश्लेषणात्मक और सृजनात्मक समाधान खोजता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय तार्किक संश्लेषण, आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र बौद्धिक क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित ज्ञान-प्रतिनिधित्व के तीन रूपों—(1) अधिनियमित या क्रियात्मक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation), (2) दृश्य या प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation), और (3) प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation)—तथा 'अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अमूर्त चिंतन क्षमता, भाषा और विचारों के अंतर्संबंध, और सोपानबद्ध पाठ्यचर्या (Spiral Curriculum) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.