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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय शैक्षणिक अवधारणा—**'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD)**—जिसे किसी शिक्षार्थी के वास्तविक विकासात्मक स्तर (जो वह बिना किसी सहायता के अकेले कर सकता है) और उसके संभावित विकासात्मक स्तर (जो वह किसी वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य (MKO) के मार्गदर्शन या सहयोग से कर सकता है) के बीच के अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक अधिगम, मचान (Scaffolding) और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

लेव वाइगोत्स्की के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' के अनुसार 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (ZPD) उस अंतर को व्यक्त करता है जो बच्चे द्वारा स्वतंत्र रूप से किए जाने वाले कार्यों और किसी वयस्क या कुशल साथी (MKO) के सहयोग से किए जाने वाले कार्यों के बीच होता है। यह अवधारणा इस बात पर जोर देती है कि शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया में 'मचान' (Scaffolding) या अस्थायी सहायता प्रदान करके शिक्षार्थी के संज्ञानात्मक विकास को उसके वर्तमान स्तर से उच्च स्तर तक पहुँचाया जा सकता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) की अवधारणा—जिसके तहत वास्तविक विकासात्मक स्तर (स्वतंत्र समस्या समाधान द्वारा निर्धारित) और संभावित विकासात्मक स्तर (वयस्क मार्गदर्शन या सक्षम साथियों के सहयोग से समस्या समाधान द्वारा निर्धारित) के बीच का अंतराल शामिल होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक विकास, सहयोगात्मक समस्या-समाधान और 'मचान या पाड़' (Scaffolding) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) तथा 'सुविधाजनक शिक्षण' (Facilitative Teaching) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'आत्म-प्रत्यय' (Self-Concept), 'सार्थक एवं स्व-प्रेरित अधिगम' (Self-Initiated Learning), और शिक्षक की एक 'सुविधादाता' (Facilitator) के रूप में भूमिका के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'अग्रिम संगठन' (Advance Organizer)** की अवधारणा—जिसके तहत किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से पहले विद्यार्थियों के सामने उच्च-स्तर के, सारांश रूप में और अधिक व्यापक समावेशी परिचयात्मक सामग्रियां प्रस्तुत की जाती हैं, ताकि शिक्षार्थी अपने संज्ञानात्मक ढांचे में पहले से मौजूद प्रासंगिक पूर्व-ज्ञान (Anchor Ideas) के साथ नए ज्ञान को तार्किक रूप से जोड़ सकें—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा के सुदृढ़ीकरण, तार्किक अवबोध और दीर्घकालिक अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) तथा 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) के सिद्धांत के अंतर्गत, सार्थक या अर्थपूर्ण अधिगम (Significant Learning) की प्रक्रिया में निम्नलिखित में से किस मनोवैज्ञानिक और कक्षा-कक्षीय शर्त को सबसे अधिक अनिवार्य माना गया है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवधारणा—**'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसके तहत किसी व्यक्ति की अपनी उन क्षमताओं के प्रति व्यक्तिगत और संज्ञानात्मक विश्वास को परिभाषित किया जाता है जो किसी विशिष्ट परिस्थिति में सफलता प्राप्त करने या किसी चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने के लिए आवश्यक कार्रवाइयों को संगठित और निष्पादित करने में सक्षम बनाती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, शैक्षणिक लचीलेपन, लक्ष्य निर्धारण और आत्म-नियमन (Self-Regulation) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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