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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage)**—जिसे लगभग 7 से 11 वर्ष की आयु के दौरान विकसित होने वाली उस मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक मूर्त वस्तुओं और वास्तविक घटनाओं के आधार पर तार्किक चिंतन, वर्गीकरण (Classification), और संरक्षण (Conservation) के गुणों को भली-भांति समझ लेता है, किंतु अमूर्त विचारों और काल्पनिक परिकल्पनाओं के साथ तार्किक संचालन करने में असमर्थ रहता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक कौशल, आनुभविक अन्वेषण और संज्ञानात्मक संतुलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (7 से 11 वर्ष) वह चरण है जहाँ बच्चे अमूर्त चिंतन करने में असमर्थ होते हैं, परंतु वे ठोस (मूर्त) वस्तुओं, घटनाओं और परिस्थितियों पर आधारित तार्किक संक्रियाएं सफलतापूर्वक कर सकते हैं। इस चरण की मुख्य विशेषताएं संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण (Classification), क्रमबद्धता (Seriation), और उत्क्रमणीयता (Reversibility) हैं। विकल्प (b) इस अवधारणा के वैज्ञानिक स्वरूप और कक्षा-कक्षीय निहितार्थ का सबसे सटीक वर्णन करता है, जबकि विकल्प (a) और (d) औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था से संबंधित हैं और विकल्प (c) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था से संबंधित है।
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