त्वरित लिंक्स
MPTET
1 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक निरूपण स्तर—**'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation)**—जिसे लगभग बाल्यावस्था के उत्तरार्ध और किशोरावस्था के दौरान विकसित होने वाली उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक मूर्त वस्तुओं या चित्रों के सहारे के बिना, अमूर्त प्रतीकों, भाषा, तार्किक संकेतों, गणितीय सूत्रों और कोडिंग प्रणालियों के माध्यम से वास्तविक दुनिया को मानसिक रूप से प्रस्तुत और विश्लेषित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, औपचारिक संक्रियात्मक विकास और उन्नत वैचारिक संकल्पनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, ज्ञान के प्रतिनिधित्व के तीन स्तर होते हैं: 1. क्रियात्मक (Enactive - कार्यों द्वारा), 2. दृश्य/प्रतिमात्मक (Iconic - छवियों या चित्रों द्वारा), और 3. प्रतीकात्मक (Symbolic - भाषा, प्रतीकों और अमूर्त संकेतों द्वारा)। 'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation) इस पदानुक्रम का सबसे विकसित और परिपक्व चरण है, जहाँ शिक्षार्थी अमूर्त अवधारणाओं, भाषा और औपचारिक तार्किक प्रणालियों के माध्यम से दुनिया को समझता है और मानसिक संचालन करता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह स्तर विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय अमूर्त चिंतन, आलोचनात्मक विश्लेषण और सैद्धांतिक ज्ञान निर्माण को गति प्रदान करता है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत जब कोई तंत्रिका पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे कार्य करने दिया जाता है, तब व्यक्ति को संतोष और आनंद की अनुभूति होती है, जबकि ऐसा न होने पर उसे झुंझलाहट या असंतोष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, प्रेरणा के स्तर और अधिगम की प्रभावशीलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर की आवश्यकता—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसके तहत व्यक्ति अपनीिक क्षमताओं, प्रतिभाओं और व्यक्तिगत संभावनाओं की पूर्ण प्राप्ति, रचनात्मक अभिव्यक्ति और अपने जीवन के चरम विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभाओं के पोषण, आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) और समग्र व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर की अधिगम प्रकार —'समस्या समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning)— की अवधारणा, जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों का उपयोग करके एक जटिल, नवीन और अनूठी समस्या का तार्किक, विश्लेषणात्मक और सृजनात्मक समाधान खोजता है तथा इससे उसकी संज्ञानात्मक क्षमताओं एवं उच्च-स्तरीय बौद्धिक योजनाओं (Cognitive Structures) का स्थायी विस्तार होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, स्वतंत्र बौद्धिक अन्वेषण और उच्च-कोटि के मानसिक प्रसंस्करण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धिमत्ता सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतःवैयक्तिक बुद्धिमत्ता' (Intrapersonal Intelligence)**—जिसे उस व्यक्तिपरक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपने स्वयं के आंतरिक भावनाओं, संवेगों, प्रेरणाओं, शक्तियों, कमजोरियों और वैचारिक मानचित्र (Self-reflection and self-awareness) को गहराई से समझता है और अपने जीवन को तदनुसार विनियमित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-regulation), metacognition (परासंज्ञान), और भावनात्मक स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) अथवा 'ग्रहणशील अधिगम' के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठक या एडवांस ऑर्गनाइज़र' (Advance Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से पहले छात्रों के संज्ञान में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और ज्ञान (पूर्व-ज्ञान) के साथ नए आने वाले सूचना-समुच्चयों को जोड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त वैचारिक ढांचा या परिचय प्रस्तुत किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा निर्माण, तार्किक अनुक्रमण और संज्ञानात्मक एकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.