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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'पर्यावरण अध्ययन' (EVS) के अंतर्गत 'वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दे एवं जलवायु परिवर्तन' के संदर्भ में, संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के अंतर्गत वर्ष 1997 में अपनाए गए ऐतिहासिक 'क्योटो प्रोटोकॉल' (Kyoto Protocol) और वर्ष 2015 के 'पेरिस समझौते' (Paris Agreement) के बीच के महत्वपूर्ण अंतरों, उनके द्वारा स्थापित कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्यों (Legally Binding Targets), विकसित एवं विकासशील देशों के लिए 'साझा लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व' (Common but Differentiated Responsibilities - CBDR) के सिद्धांत, तथा वैश्विक तापमान वृद्धि (Global Warming) को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°C या 2°C तक सीमित करने के प्रावधानों के वैज्ञानिक एवं तार्किक विश्लेषण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (b) है। क्योटो प्रोटोकॉल (1997) ने 'साझा लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व' (CBDR) सिद्धांत के तहत विशेष रूप से विकसित देशों (एनेक्सी-1 देशों) पर कानूनी रूप से बाध्यकारी ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य थोपे थे क्योंकि वे ऐतिहासिक संचय के लिए अधिक जिम्मेदार थे। इसके विपरीत, वर्ष 2015 के पेरिस समझौते ने विकसित और विकासशील दोनों ही देशों को 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान' (NDCs - Nationally Determined Contributions) के माध्यम से अपने उत्सर्जन को कम करने की स्वैच्छिक प्रक्रिया में शामिल किया, जिससे वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से नीचे (अधिमानतः 1.5°C तक) सीमित किया जा सके। अतः विकल्प (b) इन दोनों संधियों के कानूनी और संरचनात्मक स्वरूप की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या करता है।
Related Questions
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन तथा समाज सुधार के इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध करना, एक ईश्वरवाद का प्रचार करना और हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं जैसे सती प्रथा (जिसे 1829 में विलियम बेंटिक द्वारा कानून बनाकर अवैध घोषित किया गया था) का उन्मूलन करना था।
2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की गई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करना और महिलाओं की शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति में सुधार करना था।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया था, और उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्रों में पाई जाने वाली 'नवीन जलोढ़ मृदा' को 'खादर' (Khadar) कहा जाता है, जिसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है, किंतु नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी पाई जाती है।
2. बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ चिकनी और भारी काली मिट्टी जैसी होती हैं, जो सूखने पर कठोर हो जाती हैं और जिनमें नमी धारण करने की अत्यधिक क्षमता होती है।
3. राज्य के पर्वतीय एवं तराई क्षेत्रों में पाई जाने वाली 'राँड़' (Randh) और 'पंडुवा' (Parwa) मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ होती हैं और उनमें रासायनिक उर्वरकों के बिना भी धान और गेहूँ की बंपर पैदावार होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण, पक्षी विहारों और आद्रभूमि (Wetlands) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पटना पक्षी विहार' एटा जिले में स्थित क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी विहार है, जो प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक आश्रय स्थल है।
2. 'संडी पक्षी विहार' (Sandi Bird Sanctuary) हरदोई जिले में स्थित है, और इसे हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महत्व के 'रामसर आद्रभूमि' (Ramsar Wetland) स्थल के रूप में मान्यता दी गई है।
3. 'लाहौर पक्षी विहार' (Lakh Bahosi Bird Sanctuary) उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में स्थित है, जो क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा पक्षी विहार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के विशिष्ट प्रकार 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia - पठन और वर्ण-ध्वनि प्रसंस्करण अक्षमता) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'बाएँ गोलार्ध के विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया' (Visual Word Form Area - VWFA), 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area - वाक् और श्रवण-ध्वनि संलेखन), और 'सुपीरियर टेम्पोरल गाइरस' (Superior Temporal Gyrus - फॉनोलॉजिकल प्रोसेसिंग) के बीच दृश्य-श्रव्य एकीकरण विफलता, फोनोलॉजिकल डेफिसिट, तथा न्यूरोनल कनेक्टिविटी में बाधा की सक्रियण गतिकी, तथा ऐतिहासिक न्यूरोलॉजिकल प्रत्ययों और आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिस्लेक्सिया ऑप्टिमाइज्ड मल्टीसेंसरी पेडागोजी' (Orton-Gillingham Approach based Neuro-Multisensory Pedagogy) और विद्यार्थियों में ध्वनि-प्रतीक साहचर्य, दृश्य-श्रव्य समन्वय व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की विधियां और शिक्षण के सूत्र' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हर्बर्ट स्पेंसर (Herbert Spencer) और जॉन कमेनियस (John Comenius) द्वारा प्रतिपादित 'ज्ञात से अज्ञात की ओर' (From Known to Unknown) तथा 'मूर्त से अमूर्त की ओर' (From Concrete to Abstract) शिक्षण सूत्रों के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus), 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), और 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच पूर्व-ज्ञान एकीकरण (Prior Knowledge Integration), स्कीमा रीमैपिंग (Schema Remapping), और वैचारिक अमूर्तन (Conceptual Abstraction) की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड असुबेल (David Ausubel) के 'अग्रिम संगठनकर्ता सिद्धांत' (Advance Organizer Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, कॉग्निटिव-स्ट्रक्चर्ड पेडागोजी (Cognitive-Structured Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक दक्षता, तार्किक जुड़ाव व समग्र ज्ञान निर्माण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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