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हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के अंतर्गत, वाच्य (Voice) के संदर्भ में 'भाववाच्य' की पहचान हेतु निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सर्वाधिक उपयुक्त और तार्किक है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भाववाच्य उस वाच्य को कहते हैं जिसमें क्रिया या भाव की प्रधानता होती है, न कि कर्ता या कर्म की। इसमें हमेशा अकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है और प्रायः निषेधार्थक वाक्यों या असमर्थता को व्यक्त करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है, जैसे- 'मुझसे अब चला नहीं जाता।' अतः विकल्प (c) बिल्कुल सही है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'उत्तर प्रदेश की राजव्यवस्था एवं पंचायती राज' के संदर्भ में, उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 (समय-समय पर संशोधित) तथा 73वें संविधान संशोधन के पश्चात राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) की प्रशासनिक संरचना, ग्राम सभा की बैठकों के कोरम (गणपूर्ति), न्याय पंचायत की स्थापना व उसकी न्यायिक शक्तियों, तथा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायत चुनावों के संचालन से जुड़े विधिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा के सिद्धांत (Theories of Motivation)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs: शारीरिक सुरक्षा से लेकर आत्म-सिद्धि तक) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रेल स्ट्रेटम' (Ventral Striatum), 'डोपामिनर्जिक रिवॉर्ड पाथवे' (Dopaminergic Reward Pathway), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच होमियोस्टैटिक नियमन, आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation), और दीर्घकालिक लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रायन (Richard Ryan) के 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory - SDT: स्वायत्तता, सक्षमता और संबद्धता) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मोटिवेशनल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Motivational Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सार्थक सहभागिता, मनोवैज्ञानिक कल्याण व समग्र अधिगम ऊर्जा के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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समावेशी कक्षा कक्ष (Inclusive Classroom) में विभिन्न अधिगम शैलियों वाले बालकों और विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की शिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 'विभेदीकृत अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विभेदीकृत अनुदेशन का तात्पर्य यह है कि शिक्षक एक ही पाठ योजना को बिना किसी परिवर्तन के पूरी कक्षा पर समान रूप से लागू करे, ताकि सभी विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के एक ही प्रकार की शिक्षण सामग्री प्राप्त हो सके।
2. इसके अंतर्गत शिक्षक विद्यार्थियों की वर्तमान क्षमताओं, रुचियों और तत्परता स्तर के आधार पर विषयवस्तु (Content), प्रक्रिया (Process), उत्पाद (Product) और सीखने के पर्यावरणीय परिवेश में लचीलापन और संशोधन करते हैं।
3. यह दृष्टिकोण जॉन डेवी के 'करके सीखने' (Learning by Doing) और प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के सिद्धांतों पर आधारित है, जो प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences) का सम्मान करते हुए उनकी अद्वितीय क्षमता का विकास करने पर बल देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम स्थानांतरण' (Transfer of Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'समान तत्वों का सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्राइमरी सेंसरी-मोटर कॉर्टेक्स' (Primary Sensory-Motor Cortex), 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus - प्रासंगिक संदर्भ मैपिंग), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex - कार्यकारी सामान्यीकरण) के बीच तंत्रिका सिनेप्टिक शेयरिंग (Neural Synaptic Overlap), समान तंत्रिका मार्गों के सह-सक्रियण (Co-activation), और संज्ञानात्मक लचीलेपन की सक्रियण गतिकी, तथा चार्ल्स जुड (Charles Judd) के 'सामान्यीकरण के सिद्धांत' (Theory of Generalization) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-ट्रांसफर ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Transfer Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में अर्जित ज्ञान के वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग, कौशल सामान्यीकरण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में बोली जाने वाली 'भोजपुरी' और 'अवधी' बोलियों की भाषाई विशेषताओं तथा उनके विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भोजपुरी का विकास मागधी अपभ्रंश से हुआ है, जबकि अवधी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से माना जाता है, और ये दोनों ही बोलियाँ हिंदी की उपभाषा 'पूर्वी हिंदी' के अंतर्गत आती हैं।
2. भोजपुरी बोली में मुख्य रूप से मूर्धन्य ध्वनियों (जैसे ṭ, ḍ) का प्रयोग प्रचुरता से होता है और इसके प्रमुख व्याकरणिक रूपों में कर्ता कारक के साथ 'ने' परसर्ग (विभक्ति) का प्रयोग पश्चिमी हिंदी की तुलना में बहुत भिन्न या प्रायः अनुपस्थित होता है।
3. गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' की मूल रचना अवधी बोली में की गई है, जबकि संत कबीर दास की साखी और पदों में भोजपुरी और सधुक्कड़ी भाषा का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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