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बुद्धिमत्ता के 'त्रि-आयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) का प्रतिपादन किसने किया था, जिसके अनुसार बुद्धि को तीन आयामों - संक्रिया (Operations), विषय-वस्तु (Contents) और उत्पाद (Products) में वर्गीकृत किया गया है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बुद्धिमत्ता के 'त्रि-आयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) का प्रतिपादन अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) ने 1967 में किया था। इस मॉडल के अनुसार, मानवीय बुद्धि तीन स्वतंत्र आयामों का एक जटिल संकुल (Matrix) है: 1. संक्रिया (Operations - जैसे स्मृति, संज्ञान, अभिसारी चिंतन), 2. विषय-वस्तु (Contents - जैसे आकृतियाँ, प्रतीक, शब्द, व्यवहार), और 3. उत्पाद (Products - जैसे इकाइयाँ, वर्ग, संबंध, प्रणालियाँ)। प्रारंभ में इस मॉडल में 120 कारक थे, जिन्हें बाद में बढ़ाकर 150 और अंततः 180 कर दिया गया। अतः विकल्प (b) सही है।
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनाय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) के चरण में, वर्ष 1930 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए 'दांडी मार्च' (Dandi March) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह मार्च साबरमती आश्रम से दांडी तट तक कुल 240 मील की पैदल यात्रा थी, जिसमें 78 चुने हुए अनुयायी शामिल थे। 2. यह यात्रा 12 मार्च 1930 को आरंभ हुई और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर नमक कानून तोड़ा गया। 3. इस आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) में कर न अदायगी (No-Tax Campaign) का नेतृत्व मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू और गोविंद वल्लभ पंत ने जमींदारों और किसानों को संगठित करके किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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1. वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद (उलूक) हैं, और यह एक भौतिकवादी एवं pluralistic (बहुवादी) दर्शन है जो इस ब्रह्मांड की रचना 'परमाणुवाद' (Atomic Theory) के सिद्धांत पर आधारित मानता है।
2. इस दर्शन के अनुसार, संपूर्ण भौतिक जगत अदृश्य और अविभाज्य 'परमाणुओं' से मिलकर बना है, और पृथ्वी, जल, तेज (अग्नि) तथा वायु- इन चार द्रव्यों के परमाणु नित्य होते हैं, जबकि आकाश को परमाणु नहीं बल्कि एक अमूर्त विभु द्रव्य माना गया है।
3. वैशेषिक दर्शन न्याय दर्शन के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है (इसे न्याय-वैशेषिक युग्म भी कहा जाता है), और यह मोक्ष प्राप्ति के लिए 'पदार्थों के तत्वज्ञान' (षड्धर्मों या छह श्रेणियों- द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष और समवाय का ज्ञान) को आवश्यक मानता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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