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गार्डनर के अनुसार बुद्धि एक नहीं बल्कि कई प्रकार की होती है, और हर व्यक्ति की अलग क्षमताएं होती हैं।
आगमन विधि का श्रेय मुख्य रूप से फ्रांसिस बेकन (Francis Bacon) को दिया जाता है।
मानसिक आयु और वास्तविक आयु के अनुपात को 100 से गुणा करने पर बुद्धि लब्धि (IQ) प्राप्त होती है।
ई.एल. थॉर्नडाइक ने बुद्धि का बहु-कारक सिद्धांत दिया था, जिसमें कई स्वतंत्र कारक होते हैं।
आगमन विधि में पहले विशिष्ट उदाहरण दिए जाते हैं और फिर उन उदाहरणों के आधार पर सामान्य नियम बनाए जाते हैं।
डिस्ग्राफिया लेखन संबंधी एक विकार है जिसमें लिखने में कठिनाई, खराब हस्तलेखन और वर्तनी की समस्याएं होती हैं।
मैस्लो के पदानुक्रम में सबसे ऊपर 'आत्म-सिद्धिकरण' है, जहाँ व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहता है।
परियोजना विधि सक्रिय सहभागिता और व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से सीखने पर आधारित है।
ई.एल. थॉर्नडाइक ने प्रभाव का नियम दिया था, जो बताता है कि संतोषजनक परिणामों वाला व्यवहार दोहराया जाता है।
अभ्यास का नियम कहता है कि जिस कार्य को हम बार-बार दोहराते हैं, उसे सीखने की प्रक्रिया सुदृढ़ हो जाती है।
परियोजना विधि सक्रिय अधिगम पर आधारित है, जहाँ छात्र वास्तविक जीवन की समस्याओं पर प्रोजेक्ट के माध्यम से कार्य करते हुए सीखते हैं।
संस्कृति बच्चों को उनके आसपास की दुनिया को समझने के लिए उपकरण (जैसे भाषा, प्रतीक) और वैचारिक ढांचा प्रदान करती है।
थॉर्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' (Law of Effect) के अनुसार, जिस अनुक्रिया से संतोष मिलता है, उद्दीपक-अनुक्रिया के बीच का बंधन उतना ही मजबूत हो जाता है।
मचान (Scaffolding) उस अस्थायी मार्गदर्शन या सहायता को कहते हैं जो एक कुशल व्यक्ति द्वारा सीखने वाले को लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए दी जाती है।
थॉर्नडाइक के सिद्धांत को संबंधवाद कहा जाता है क्योंकि यह उद्दीपक (S) और अनुक्रिया (R) के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित करने पर जोर देता है।
स्पीयरमैन के अनुसार, G-कारक (General factor) वह सामान्य मानसिक ऊर्जा है जो सभी प्रकार की बौद्धिक गतिविधियों में आवश्यक होती है।
पावलोव के सिद्धांत में सामान्यीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें प्राणी समान उद्दीपकों के प्रति एक ही जैसी अनुक्रिया करना सीख जाता है।
प्रसंस्करण गति मापती है कि व्यक्ति दी गई जानकारी को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से प्रोसेस करके प्रतिक्रिया दे सकता है।
खोज विधि में छात्र स्वयं एक अन्वेषक की भूमिका निभाता है और समस्याओं का समाधान खोजता है।
ई.एल. थॉर्नडाइक ने बुद्धि को कई स्वतंत्र और विशिष्ट कारकों का समूह माना है, जिसे बहु-कारक सिद्धांत कहा जाता है।