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UPTET — Free MCQ Questions & Mock Test
Clear filterउत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की तैयारी के लिए यह विशेष शिक्षण अनुभाग है। इस पेज पर आप बाल विकास, शिक्षण विधियों, हिंदी व्याकरण और अन्य अनिवार्य विषयों के मानक प्रश्नों का अभ्यास कर सकते हैं, जो नवीनतम परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं।
🎯 244 Mock Tests Khelein
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय संरचना के संदर्भ में, 'बुंदेलखंड के पठारी क्षेत्र' की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बुंदेलखंड का पठार उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित है, जिसका निर्माण प्राचीनतम प्री-कैंब्रियन युग के नाइस (Gneiss), ग्रेनाइट (Granite) और शिस्ट (Schist) चट्टानों से हुआ है। 2. इस क्षेत्र में सामान्यतः लाल और भूरे रंग की हल्की मृदा पाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'परवा', 'मार', 'काबर' और 'रास' के नाम से जाना जाता है, जो कृषि की दृष्टि से कम उपजाऊ होने के कारण मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर होती है। 3. उत्तर प्रदेश का यह पठारी क्षेत्र खनिज संपदा के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध है, जहाँ देश के सबसे बड़े ग्रेफाइट, कोयला और पेट्रोलियम के भंडार पाए जाते हैं, जिसके कारण यहाँ भारी उद्योगों का जाल बिछा हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि प्रणालियों के संदर्भ में, 'गंगा-यमुना दोआब' क्षेत्र में पाई जाने वाली नवीन जलोढ़ मृदा (Khadar Soil) और इसकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. खादर मृदा को स्थानीय भाषा में 'नयी जलोढ़' या 'कच्छ' मृदा भी कहा जाता है, जिसका निर्माण प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दौरान नदियों द्वारा लाई जाने वाली नई उपजाऊ गाद (Silt) के निक्षेपण से होता है। 2. इस मृदा में चूने, पोटाश और मैग्नीशियम की प्रचुरता पाई जाती है, जबकि इसमें नाइट्रोजन और ह्यूमस (Humus) की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, जिसके कारण इसमें धान, गेहूँ और गन्ने की फसलें अत्यधिक मात्रा में पैदा होती हैं। 3. यह मृदा उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्रों (जैसे झाँसी, महोबा और ललितपुर) में सबसे अधिक क्षेत्रफल में विस्तृत है, जहाँ यह कठोर चट्टानों के अपक्षय (Weathering) के परिणामस्वरूप बनती है और इसमें जल धारण करने की क्षमता शून्य होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु संदर्भ में, 'तराई क्षेत्र' (Terai Region) की विशिष्टताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तराई क्षेत्र भाबर पेटी के ठीक दक्षिण में स्थित एक संकीर्ण, दलदली और नम भूमि की पट्टी है, जहाँ महीन अवसाद (जैसे सिल्ट और चिकनी मिट्टी) का निक्षेपण होता है। 2. इस क्षेत्र में भूमिगत नदियाँ धरातल पर पुनः प्रकट होती हैं, जिसके कारण यहाँ वर्ष भर अत्यधिक नमी बनी रहती है और यह क्षेत्र घने जंगलों, लंबी घासों और उच्च जैव विविधता के लिए जाना जाता है। 3. उत्तर प्रदेश के इस तराई क्षेत्र में मुख्य रूप से धान और गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, क्योंकि यहाँ की मृदा में बालू की प्रधानता होती है और जल धारण क्षमता अत्यंत कम होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु संदर्भ में, यहाँ की जलवायु और तापमान प्रवृत्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश की जलवायु मुख्य रूप से 'उष्णकटिबंधीय मानसूनी' (Tropical Monsoon Type) प्रकार की है, जहाँ राज्य का अधिकांश भाग ग्रीष्मकाल में अत्यधिक गर्म और शीतकाल में अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। 2. राज्य के दक्षिणी पठारी और बुंदेलखंड क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु में तापमान सबसे अधिक दर्ज किया जाता है, जिसका मुख्य कारण इस क्षेत्र का कर्क रेखा के अत्यधिक निकट होना और बलुआ व पथरीली मिट्टी का होना है। 3. उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) का प्रवेश मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी की शाखा से होता है, जिसके कारण राज्य के पूर्वी तराई क्षेत्रों से पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ने पर वर्षा की मात्रा में क्रमिक वृद्धि होती जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ में, 'महाजनपद काल' और उससे जुड़े उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों की अवस्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राचीन काल के 'छःवीं शताब्दी ईसा पूर्व' (6th Century BCE) के 16 महाजनपदों में से वर्तमान उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र में कुल 8 (आठ) महाजनपद पूर्णतः या आंशिक रूप से स्थित थे, जिनमें कुरु, पांचाल, शूरसेन, वत्स, मल्ल, काशी, कौशल और चेदि प्रमुख थे। 2. 'शूरसेन महाजनपद' की राजधानी 'मथुरा' थी, जो यमुना नदी के तट पर स्थित थी और बौद्ध ग्रंथों के अनुसार यहाँ के राजा अवन्तिपुत्र ने बुद्ध के प्रभाव से बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। 3. 'वत्स महाजनपद' की राजधानी 'कौशंबी' थी, जो वर्तमान प्रयागराज के समीप स्थित थी और यह महाजनपद अपने समय में व्यापार, वाणिज्य तथा वस्त्र निर्माण के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध था, जहाँ राजा उदयन शासन करते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन (EVS) की कक्षा में 'राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा' (NCF 2005) के मार्गदर्शन और उपागम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन को एक स्वतंत्र विषय के रूप में कक्षा 1 और 2 से ही पढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की अवधारणाओं को एकीकृत किया गया हो। 2. NCF 2005 के अनुसार EVS का पाठ्यक्रम छह प्रमुख थीमों (Themes) पर आधारित है: परिवार और मित्र, भोजन, पानी, आश्रय, यात्रा, और 'हम चीजें कैसे बनाते हैं'। 3. यह विषय बच्चों के स्थानीय परिवेश और वास्तविक जीवन के अनुभवों को विद्यालय के ज्ञान से जोड़ने पर बल देता है, जिससे रटने की प्रवृत्ति से मुक्ति मिल सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ में, यहाँ की प्राचीन संस्कृति, महाजनपदों और उनके प्रमुख नगरों की अवस्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राचीन बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' के अनुसार, छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 16 महाजनपदों में से वर्तमान उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में कुल 8 महाजनपद स्थित थे, जिनमें 'कुरु', 'पंचाल', 'शूरसेन', 'वत्स', 'मल्ल', 'काशी', 'कोशल' और 'चेदि' शामिल थे। 2. 'मल्ल महाजनपद' की दो प्रमुख राजधानियाँ कुशीनगर (कुशीनारा) और पावा थीं, जहाँ क्रमशः भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण और जैन धर्म के संस्थापक महावीर स्वामी को मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त हुआ था। 3. 'पंचाल महाजनपद' की राजधानी 'अहिच्छत्र' (वर्तमान बरेली के पास) उत्तरी पंचाल के रूप में और 'काम्पिल्य' (वर्तमान फर्रुखाबाद के पास) दक्षिणी पंचाल के रूप में प्रसिद्ध थी, जो महाभारत काल में द्रुपद की राजधानी हुआ करती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु संदर्भ में, राज्य में ग्रीष्मकाल में चलने वाली गर्म एवं शुष्क हवाओं जिन्हें 'लू' कहा जाता है, तथा यहाँ की वर्षा ऋतु के वितरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली उष्ण तथा शुष्क पछुआ हवाओं को 'लू' कहा जाता है, जिनका प्रभाव विशेष रूप से राज्य के पश्चिमी और मध्यवर्ती मैदानी जिलों में सबसे अधिक तीव्रता से महसूस किया जाता है। 2. राज्य में होने वाली कुल वर्षा का लगभग 75% से 80% भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से जून के अंतिम सप्ताह से सितंबर माह तक सक्रिय रहता है। 3. उत्तर प्रदेश में मानसून की वर्षा का वितरण एकसमान है, जिसके कारण राज्य के पूर्वी तराई क्षेत्रों से लेकर पश्चिमी मैदानी तथा दक्षिणी बुंदेलखंड के पठारी क्षेत्रों तक वर्षा की मात्रा में कोई विशेष भिन्नता या गिरावट दर्ज नहीं की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु संदर्भ में, राज्य की वर्षा ऋतु और मानसून की सक्रियता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी वाली शाखा मुख्य रूप से पूर्वी तराई और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में अधिक वर्षा करती है, तथा जैसे-जैसे यह मानसून पूर्व से पश्चिम की ओर तथा उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ता है, वर्षा की मात्रा में धीरे-धीरे कमी आती जाती है। 2. राज्य में होने वाली कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 75% से 80% भाग केवल वर्षा ऋतु (जून से सितंबर) के दौरान ही प्राप्त होता है, जबकि शेष शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होने वाली वर्षा रबी की फसलों (विशेषकर गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभदायक होती है। 3. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी और बुंदेलखंड क्षेत्र में मानसूनी वर्षा का औसत राज्य के अन्य भागों की तुलना में सबसे अधिक दर्ज किया जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र विंध्यन पहाड़ियों के अत्यधिक निकट स्थित होने के कारण मानसून बादलों को पूर्ण रूप से रोक लेता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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