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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test

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History of India ki taiyari ke liye 3670+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहिती के प्रभुत्व का कड़ा विरोध करते हुए उपनिषदों के एकेश्वरवादी दर्शन को समाज के सुधार का आधार बनाया। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और साथ ही पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए जन्मना जाति व्यवस्था के स्थान पर गुण, कर्म और स्वभाव पर आधारित वर्ण व्यवस्था का समर्थन किया। 3. प्रार्थना समाज के संस्थापक आत्माराम पांडुरंग थे, जिन्हें न्याय मूर्ति महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ, तथा इस संस्था का मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों पर केंद्रित था। 4. यंग बंगाल आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने सामाजिक सुधारों के साथ-साथ पारंपरिक हिंदू धर्म की कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया, और उनके शिष्यों (डेरोज़ियंस) को कलकत्ता में रूढ़िवादी समाज का पूर्ण समर्थन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और उनके प्रारंभिक राजनीतिक उत्थान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की स्पष्ट सूची मिलती है, जिसमें मज्झिम निकाय और दीघ निकाय जैसे बौद्ध ग्रंथ भी इन राज्यों की राजनीतिक संरचना का वृहद विवरण प्रस्तुत करते हैं। 2. मगध साम्राज्य के उत्थान में उसकी भौगोलिक अवस्थिति की प्रमुख भूमिका थी, क्योंकि इसकी प्राचीन राजधानी राजगीर (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी तथा इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क उपलब्ध था। 3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और विजय की नीति के माध्यम से मगध की शक्ति को सुदृढ़ किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने वज्जी महासंघ को पराजित करने के लिए वैशाली में कूटनीति और 'वासकार' नामक मंत्री का उपयोग किया था। 4. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था, जिसमें बौद्ध संघ के भीतर गंभीर मतभेदों के कारण स्थविर और महासंघिक संप्रदाय का विभाजन हुआ था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के माध्यम से सतारा, नागपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध का विलय वर्ष 1856 में कुशासन के आधार पर किया गया, जिससे अवध के सैनिकों और पारंपरिक अभिजात वर्ग में गहरा असंतोष व्याप्त हुआ। 2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा हिंदू धर्म त्यागने वाले व्यक्तियों को भी पैतृक संपत्ति में अधिकार देने का प्रावधान किया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म के प्रचार और धर्मांतरण का षड्यंत्र माना। 3. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की मुक्त व्यापार नीति और औपनिवेशिक आर्थिक शोषण के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग पूरी तरह नष्ट हो गए, क्योंकि ब्रिटिश आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाकर उन्हें भारतीय बाजारों में संरक्षण प्रदान किया गया था। 4. सैन्य कारणों के तहत वर्ष 1856 के 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) ने बंगाल आर्मी के नए रंगरूटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार विदेश जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया, जिससे पारंपरिक हिंदू सैनिकों में अपनी जाति और धर्मभ्रष्ट होने का गंभीर भय उत्पन्न हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रमुख संतों, उनके दार्शनिक सिद्धांतों और उनके द्वारा स्थापित सिलसिलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शंकराचार्य के 'अद्वैत वेदांत' के विपरीत दक्षिण भारत के संत रामानुज ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार ब्रह्म और जीव में भेद होते हुए भी जीव ब्रह्म का ही एक अंश है तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए 'प्रपत्ति' (पूर्ण आत्मसमर्पण) मार्ग का विधान किया गया। 2. सूफी मत के 'सुहरवर्दी सिलसिले' के संस्थापक शिहाबुद्दीन सुहरवर्दी थे, किंतु भारत में इस सिलसिले को लोकप्रिय बनाने का श्रेय शेख बहाउद्दीन जकारिया को जाता है, जिन्होंने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय संरक्षण और शाही अनुदानों को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। 3. महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी के रचयिता) और संत नामदेव ने पंढरपुर के विट्ठल (विठोबा) को अपना आराध्य मानते हुए जातिगत भेदभाव और रूढ़िवादिता का पुरजोर विरोध किया तथा भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। 4. सूफी संतों में 'वल्दत-उल-वुजूद' (अस्तित्व की एकता) के दार्शनिक सिद्धांत का प्रतिपादन इब्न-अरबी द्वारा किया गया था, जिसका अर्थ यह है कि सृष्टिकर्ता (अल्लाह) और उसकी रचना (ब्रह्मांड) में कोई मौलिक भेद नहीं है, क्योंकि सब कुछ उसी का प्रकटीकरण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल की नीति) का प्रतिपादन किया था ताकि हिंद महासागर में पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित किया जा सके। 2. अल्बुकर्क ने वर्ष 1510 में बीजापुर के शासक यूसुफ आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली साम्राज्य का स्थायी प्रादेशिक आधार बनाया तथा क्षेत्र में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का साहसिक प्रयास किया। 3. नूनू डी कुन्हा ने वर्ष 1530 में पुर्तगालियों की आधिकारिक राजधानी को कोचीन से हटाकर गोवा स्थानांतरित कर दिया तथा हुगली और बेसिन में भी पुर्तगाली बस्तियों का विस्तार किया। 4. पुर्तगालियों द्वारा हिंद महासागर से व्यापार करने वाले अन्य जहाजों पर 'कार्टेज' (Cartaz) नामक कर वसूल किया जाता था, किंतु उनके बेड़े में से किसी भी एशियाई जहाज को अरब सागर में प्रवेश करने की कभी अनुमति नहीं दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की विफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1857 के विद्रोह के समय अधिकांश देशी रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और साहूकारों ने ब्रिटिश सत्ता के प्रति वफादारी दिखाई या प्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजों का सहयोग किया, जिससे विद्रोही सेनाओं को अखिल भारतीय स्तर पर कोई संगठित वित्तीय या राजनीतिक आश्रय नहीं मिल सका। 2. दिल्ली के मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का औपचारिक सम्राट घोषित तो किया गया था, किंतु उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था, सैन्य नेतृत्व की अक्षमता और आपसी गुटबाजी के कारण वे विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्रोही सैनिकों के बीच आवश्यक सामरिक समन्वय स्थापित करने में पूरी तरह असफल रहे। 3. आधुनिक सैन्य उपकरणों, रेलवे, टेलीग्राफ और प्रशासनिक दक्षता से लैस ब्रिटिश सेना के मुकाबले भारतीय विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीयकृत योजना थी और न ही कोई एकीकृत सैन्य कमान, जिसके कारण वे लंबी अवधि के युद्ध में टिक नहीं सके। 4. विद्रोह के दौरान अधिकांश आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और पश्चिमी शिक्षा प्राप्त बुद्धिजीवियों ने क्रांतिकारियों की खुलकर आर्थिक और वैचारिक सहायता की, क्योंकि वे अंग्रेजों की आर्थिक नीतियों से पूरी तरह संतुष्ट थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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महात्मा गांधी के भारत के प्रारंभिक राजनीतिक आंदोलनों — चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकटिया' प्रणाली थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान जब फसल का उत्पादन सामान्य वर्ष के एक-चौथाई (25%) से भी कम रह गया था, तब राजस्व संहिता के नियमानुसार किसानों का लगान पूरी तरह माफ किया जाना चाहिए था, किंतु ब्रिटिश प्रशासन ने इसे मानने से इनकार कर दिया था। 3. असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन (1920) में कांग्रेस द्वारा असहयोग के प्रस्ताव की औपचारिक पुष्टि की गई, जिसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के साथ-साथ सरकारी अदालतों, स्कूलों और विधान परिषदों के त्याग का आह्वान किया गया था। 4. चौरी-चौरा की हिंसक घटना के पश्चात बारडोली में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिसका उस समय देश के सभी प्रमुख युवा और वरिष्ठ नेताओं ने बिना किसी मतभेद के पूर्ण समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के संयुक्त सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले को घेर लिए जाने के बाद, रानी लक्ष्मीबाई ने कालपी की ओर प्रस्थान किया जहाँ तात्या टोपे की सेना ने आकर उनसे संपर्क किया और दोनों ने मिलकर ग्वालियर के सिंधिया शासक को चुनौती दी। 2. ग्वालियर के पतन के पश्चात तात्या टोपे ने मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लंबे समय तक छापामार (गुएरिला) युद्ध जारी रखा, और उन्हें नरवर के एक स्थानीय जागीरदार मानसिंह के साथ हुए विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़ा गया था। 3. ग्वालियर के युद्ध में अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाली रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से प्रभावित होकर जनरल ह्यूरोज ने स्वयं यह टिप्पणी की थी कि 'विद्रोही नेताओं में रानी लक्ष्मीबाई एकमात्र ऐसी महिला है जो सर्वोत्तम और सबसे बहादुर है'। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व तथा उनके सैन्य संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आरा की प्रसिद्ध विजय के पश्चात बाबू कुंवर सिंह ने अपनी सैन्य रणनीतिक क्षमता का परिचय देते हुए गंगा नदी पार की और मिर्जापुर, रीवा, बांदा तथा लखनऊ होते हुए कालपी तक का सफल सैन्य अभियान चलाया, जहाँ उन्होंने तात्या टोपे की सेना से संपर्क किया। 2. ब्रिटिश सेनापतियों (जैसे मेजर विन्सेंट आयर और कैप्टन डनबार) से लगातार संघर्ष के बाद जब जगदीशपुर पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया, तब अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध एक प्रभावी गोरिल्ला (छापामार) युद्ध का संचालन जारी रखा। 3. अमर सिंह के नेतृत्व में कैमूर क्षेत्र में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की गई थी, जिसके तहत अंग्रेजों को लगान देने से इंकार करने वाले स्थानीय किसानों और जमींदारों से सहयोग प्राप्त किया गया तथा ब्रिटिश रसद आपूर्ति मार्गों को पूरी तरह बाधित कर दिया गया था। 4. अप्रैल 1858 में जगदीशपुर वापसी के अंतिम संघर्ष के दौरान ब्रिटिश सेना के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में वीर कुंवर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उसी युद्धभूमि में लड़ते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की कला, वास्तुकला और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम 'महामल्ल' के शासनकाल में करवाया गया था, जबकि पल्लव वंश के ही राजसिंह (नरसिंहवर्मन द्वितीय) ने कांचीपुरम के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। 2. वातापी (बादामी) के चालुक्य वंश के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत और जीवंत ऐतिहासिक विवरण महाकवि रविचर्ति द्वारा रचित ऐहोल शिलालेख (प्रशस्ति) में प्राप्त होता है। 3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, जिसका विस्तृत उल्लेख उत्तरमेरूर अभिलेखों में मिलता है, के अंतर्गत ग्राम सभाओं के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (घड़े की पर्ची) नामक अनूठी लोकतांत्रिक लॉटरी प्रणाली का प्रयोग किया जाता था। 4. हर्ष के कन्नौज धर्मसभा के दौरान महायान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए चीनी यात्री ह्वेनसांग को सभा का अध्यक्ष बनाया गया था, किंतु ह्वेनसांग की इस सर्वोच्च धार्मिक स्थिति से ईर्ष्यावश हीनयानियों और ब्राह्मणों ने सभा के पंडाल में आग लगाने का असफल षड्यंत्र रचा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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