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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test

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History of India ki taiyari ke liye 3670+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवध में विद्रोह की शुरुआत 30 मई 1857 को हुई, जिसके पश्चात बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को नवाब घोषित कर सत्ता संभाली और कैम्पबेल तथा आउट्राम की संयुक्त अंग्रेजी सेना के विरुद्ध लखनऊ की रक्षा का कड़ा प्रतिरोध किया। 2. 'फैजाबाद के मौलवी' के रूप में प्रसिद्ध अहमदुल्लाह शाह ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को करारी मात दी थी, तथा उनकी अद्भुत सैन्य नेतृत्व क्षमता और ब्रिटिश विरोधी कट्टर रुख के कारण अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था। 3. बेगम हजरत महल ने अवध के पतन के उपरांत अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था और ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई पेंशन को स्वीकार कर लखनऊ में ही अपने जीवन के अंतिम दिन व्यतीत किए। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः रुहेलखंड से ब्रिटिश समर्थक पुवायाँ के राजा के पास शरण लेने के दौरान हुए विश्वासघात के बाद ब्रिटिश सेना द्वारा मार दिया गया था, और उनके शव के साथ ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की विफलता और उसके नेतृत्व की आंतरिक कमजोरियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस विद्रोह के पास किसी एक केंद्रीय प्रामाणिक राजनीतिक दृष्टिकोण या सुविचारित भविष्य की प्रशासनिक योजना का सर्वथा अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के विद्रोही नेता अपने-अपने स्थानीय हितों से प्रेरित होकर संघर्ष करते रहे। 2. ब्रिटिश सेनापतियों की तुलना में विद्रोही खेमे में उच्च स्तरीय सैन्य नेतृत्व और तालमेल का भारी संकट था, और अधिकांश भारतीय नेतृत्व आधुनिक सैन्य तकनीक, तोपखाने के प्रयोग और समन्वित सामरिक रणनीति के मामले में अंग्रेजों से बहुत पीछे था। 3. भारत के अधिकांश बड़े रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और नवाबों ने विद्रोही ताकतों का खुलकर समर्थन किया था, जिसके फलस्वरूप अंग्रेजों को पूरे भारत में व्यापक जन-समर्थन प्राप्त करने से रोकने में सफलता मिली। 4. पंजाब और दक्षिण भारत के अधिकांश क्षेत्र तथा आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग और व्यापारी समुदाय इस विद्रोह से या तो तटस्थ रहे या उन्होंने ब्रिटिश शासन के पक्ष में अपनी निष्ठा व्यक्त की, जिससे विद्रोह का दायरा काफी सीमित हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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ग़दर पार्टी और उसके संस्थापकों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 'पैसेफिक कोस्ट हिंद एसोसिएशन' की स्थापना लाला हरदयाल के प्रयासों से की गई थी, जिसे आगे चलकर 'ग़दर पार्टी' के रूप में प्रसिद्धि मिली। 2. ग़दर पार्टी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक पत्र 'ग़दर' मुख्य रूप से गुरुमुखी लिपि में ही प्रकाशित होता था ताकि पंजाब के किसानों और प्रवासियों तक इसकी पहुँच आसानी से हो सके। 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर ग़दर पार्टी के नेताओं ने भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह भड़काने के लिए 'ग़दर षड्यंत्र' की रूपरेखा तैयार की थी और बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय भारत लौटे थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा संचालित संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जगदीशपुर के 80 वर्षीय जमींदार वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध दानापुर के विद्रोही सैनिकों के साथ मिलकर आरा पर अधिकार किया था, तथा ब्रिटिश जनरल कैप्टन डनबर की सेना को बुरी तरह पराजित किया था। 2. कुंवर सिंह ने अपनी अद्भुत छापामार युद्धनीति (Guerrilla Warfare) और सामरिक कौशल का परिचय देते हुए आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर क्षेत्रों में अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी थी, तथा गंगा नदी पार करते समय ब्रिटिश सैनिकों की गोली लगने के कारण अपना एक हाथ काटकर गंगा को समर्पित कर दिया था। 3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को जारी रखा, तथा कैम्पबेल और लूगार्ड की सेनाओं के विरुद्ध प्रभावी नेतृत्व प्रदान करते हुए एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की थी। 4. अमर सिंह को अंततः नेपाल के जंगलों में शरण लेनी पड़ी थी जहाँ अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया गया, तथा भारत के गवर्नर-जनरल को 'वाइरॉय' (Viceroy) की अतिरिक्त उपाधि दी गई, जिसके तहत लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वाइसराय बने। 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियाسतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और उनके विलय की नीति (Doctrine of Lapse) को समाप्त किया जाता है। 3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता और बिना किसी नस्लीय या धार्मिक भेदभाव के लोक सेवाओं में भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च पदों पर नियुक्त करने का स्पष्ट वचन दिया गया था, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने शत-प्रतिशत ईमानदारी से तुरंत लागू भी कर दिया था। 4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों के आधार पर यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया तथा बंगाल की सेना में जातियों और क्षेत्रों के संतुलन के तहत 'फूट डालो और राज करो' की नीति को संस्थागत रूप दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस विद्रोह के पास संपूर्ण भारत के लिए कोई सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण, एकीकृत प्रशासनिक योजना या भविष्य का कोई स्पष्ट वैकल्पिक ढांचा नहीं था। 2. विद्रोही खेमे में केंद्रीयकृत कमान और उच्च स्तरीय सैन्य समन्वय का पूर्ण अभाव था, तथा विभिन्न क्षेत्रों के नेता अपने स्थानीय हितों और तात्कालिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर लड़ रहे थे। 3. भारत के अधिकांश बड़े रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और आधुनिक शिक्षित वर्ग ने विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया, जिसके कारण अंग्रेजों को पूरे भारत में व्यापक प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 4. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक सैन्य तकनीक, कुशल तोपखाना, अनुशासित सैनिक और उत्कृष्ट संचार माध्यम (जैसे टेलीग्राफ) उपलब्ध थे, जिसके समक्ष बिखरे हुए विद्रोही सैनिक टिक नहीं सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके उत्तराधिकारी अमर सिंह द्वारा चलाए गए प्रतिरोध के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध दानापुर रेजिमेंट के विद्रोही सिपाहियों का नेतृत्व करते हुए आरा पर अधिकार कर लिया था और ब्रिटिश अधिकारी कैप्टन डनबर की सेना को परास्त किया था। 2. कुंवर सिंह ने अपनी अद्वितीय छापामार युद्धनीति का परिचय देते हुए आजमगढ़ में ब्रिटिश सेना को हराया था, तथा गंगा नदी पार करते समय अंग्रेजों की गोली लगने के कारण अपना बायां हाथ काटकर गंगा को समर्पित कर दिया था। 3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को जारी रखा और कैम्पबेल तथा लूगार्ड की संयुक्त सेना के समक्ष कभी आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि उनकी मृत्यु गोरखपुर की जेल में हुई थी। 4. अमर सिंह द्वारा जगदीशपुर क्षेत्र में स्थापित समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन पूरी तरह से ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा नियुक्त स्थानीय जमींदारों के माध्यम से किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महिलाओं, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों की भूमिका तथा कराची अधिवेशन (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं ने शराब की दुकानों, विदेशी कपड़ों की दुकानों और अफीम के अड्डों पर बड़े पैमाने पर धरना दिया तथा कांग्रेस के इस संघर्ष को अभूतपूर्व जन-समर्थन प्रदान किया। 2. भारतीय व्यापारी और उद्योगपति वर्ग ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का सक्रिय समर्थन किया, किंतु गोलमेज सम्मेलनों और वित्तीय सुरक्षा के मुद्दों पर वे कांग्रेस के पूर्ण स्वराज के प्रस्ताव से हमेशा असहमत रहे। 3. वर्ष 1931 के कराची अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति' (Fundamental Rights and National Economic Programme) से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया, जिसकी अध्यक्षता वल्लभभाई पटेल ने की थी। 4. गांधी-इरविन समझौते के तहत कांग्रेस ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की स्वीकृति दी, किंतु इस समझौते में पुलिस अत्याचारों की निष्पक्ष जांच की मांग को ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास और 'नरम दल-गरम दल' काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) के दौरान नरमपंथी नेताओं द्वारा अपनाई गई कार्यशैली को उग्र राष्ट्रवादियों ने 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' (Political Mendicancy) की संज्ञा दी थी, क्योंकि उनका मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता और क्रमिक सुधारों में था। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के मुद्दे को लेकर नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच तीखा मतभेद हुआ, किंतु गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का प्रस्ताव केवल बंगाल तक सीमित रखते हुए समूचे देश में लागू करने से बचा गया। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस के मंच से पहली बार दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में 'स्वराज' (Self-Government) शब्द का आधिकारिक रूप से प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे गरमपंथियों की एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जाता है। 4. सूरत के 1907 के विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने दमन और अनुनय की 'मॉर्ले-मिंटो नीति' अपनाई, जिसके तहत वर्ष 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम के माध्यम से मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था कर कांग्रेस के भीतर और राष्ट्रीय आंदोलन में सांप्रदायिक विभाजन की नींव रख दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, 'मलिक काफूर' के दक्षिण अभियानों तथा 'अलाउद्दीन खिलजी' की बाजार नियंत्रण प्रणाली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा दक्षिण भारत के राज्यों (देवगिरी, वारंगल, होयसल और पाण्ड्य) पर विजय प्राप्त करने के लिए भेजे गए मलिक काफूर ने सबसे पहले वारंगल के काकतीय शासक प्रतापरुद्रदेव द्वितीय को पराजित किया था और वहीं से विश्व प्रसिद्ध 'कोहिनूर हीरा' प्राप्त किया था। 2. अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण प्रणाली को सख्ती से लागू करने के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक नए अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिनका मुख्य कार्य वस्तुओं के मूल्य निर्धारित करना और जमाखोरों पर कड़ी नजर रखना था। 3. बाजार में अन्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अलाउद्दीन ने ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्यान्न की बिक्री पर प्रतिबंध लगाते हुए यह अनिवार्य कर दिया था कि सुल्तान के भंडार गृहों के लिए सीधे किसानों से राजस्व के रूप में अनाज वसूला जाए। 4. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था, किंतु शाही दरबारियों और उच्च कुलीन वर्ग के लिए निजी आवासों में शराब पीने की सीमित छूट प्रदान की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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