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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में 'रूब्रिक्स' (Rubrics) का प्रयोग मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
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Detailed Explanation
पर्यावरण अध्ययन (EVS) शिक्षण में 'रूब्रिक्स' (Rubrics) एक स्पष्ट मूल्यांकन उपकरण है जिसका उपयोग विद्यार्थियों के कार्य, जैसे कि प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो, या सहयोगात्मक गतिविधियों का गुणात्मक और मानकीकृत (Standardized) आकलन करने के लिए किया जाता है। यह छात्रों को यह स्पष्ट रूप से समझने में मदद करता है कि उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किन मानदंडों पर किया जाएगा।
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों, पक्षी विहारों और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पटना पक्षी विहार' एटा जिले में स्थित उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी विहार है, जो अपने छोटे क्षेत्रफल के बावजूद प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक आश्रय स्थल है।
2. 'बखिरा पक्षी विहार' संतकबीरनगर जिले में स्थित है, जिसे हाल ही में रामसर आद्रभूमि (Ramsar Wetland) स्थल के रूप में मान्यता दी गई है और यह झील राप्ती नदी के बेसिन के अंतर्गत आती है।
3. 'लाहौर पक्षी विहार' (Lakh Bahosi Bird Sanctuary) उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में स्थित है, जो क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा पक्षी विहार है।
4. 'ओखला पक्षी विहार' गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद जिलों की सीमा पर यमुना नदी के तट पर स्थित है, जहाँ सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी जलपक्षी आते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत एवं लेव वायगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के तुलनात्मक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे का मानना था कि बालक का संज्ञानात्मक विकास उसकी जैविक परिपक्वता (Biological Maturation) और पर्यावरण के साथ सक्रिय भौतिक अन्वेषण से पहले होता है, जबकि भाषा इस विकास का उपोत्पाद (By-product) मात्र है।
2. वायगोत्स्की के अनुसार भाषा और चिंतन आरंभ में दो स्वतंत्र और अलग गतिविधियाँ होती हैं, लेकिन लगभग 2 वर्ष की आयु के आसपास बालक के भीतर भाषा और विचार आपस में मिल जाते हैं, जिससे बालक 'आंतरिक वाक्' (Inner Speech) के माध्यम से अपने चिंतन को विनियमित करना सीखता है।
3. पियाजे के सिद्धांत में 'बालक को एक छोटा वैज्ञानिक' (Little Scientist) माना गया है जो ज्ञान का निर्माण स्वयं अपने स्वतंत्र प्रयासों से करता है, जबकि वायगोत्स्की के सिद्धांत में ज्ञान के सह-निर्माण (Co-construction) के लिए सामाजिक अंतःक्रिया और सांस्कृतिक उपकरणों को केंद्रीय महत्व दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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शिक्षा मनोविज्ञान और अधिगम के सिद्धांतों के संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation), 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'क्रमबद्धता' (Seriation) जैसी मानसिक योग्यताओं का पूर्ण विकास प्रदर्शित करता है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-आकृतिक स्वरूप के संदर्भ में, 'बुंदेलखंड पठार' और 'विंध्यन श्रेणी' से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बुंदेलखंड का पठारी क्षेत्र उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में स्थित है, जो प्राचीन गोंडवाना लैंड का हिस्सा है और यहाँ ग्रेनाइट तथा नीस (Gneiss) जैसी प्राचीन आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानें पाई जाती हैं।
2. इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ जैसे बेतवा, केन, चंबल और धसान उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुए यमुना नदी में मिलती हैं और अपने मार्ग में गहरे कंदराओं (Ravines) व बीहड़ों का निर्माण करती हैं।
3. विंध्यन पर्वत श्रेणी का विस्तार उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, सोनभद्र और चित्रकूट जिलों के कुछ भागों में पाया जाता है, जहाँ बलुआ पत्थर (Sandstone) की प्रचुरता है जिसका उपयोग ऐतिहासिक भवनों और स्थापत्य कला में बड़े पैमाने पर किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि क्षेत्रों और फसल प्रतिरूप (Crop Pattern) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड क्षेत्र) में पाई जाने वाली 'मार' और 'भाट' मृदाएं क्रमशः चिकनी और उपजाऊ होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की अपूर्व क्षमता होती है, जिस कारण यहाँ बिना सिंचाई के भी रबी की फसलें (जैसे चना और मटर) अच्छी हो जाती हैं।
2. उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पाई जाने वाली 'जलोढ़ मृदा' (Alluvial Soil) को स्थानीय भाषा में 'खादर' (नवीन जलोढ़) और 'बांगर' (प्राचीन जलोढ़) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जो पोटाश और चूने से समृद्ध होती है लेकिन नाइट्रोजन और ह्यूमस की इसमें कमी पाई जाती है।
3. राज्य के तराई क्षेत्र में पाई जाने वाली 'तराई मृदा' दलदली और नम होती है, जो मुख्य रूप से धान और गन्ने की सघन कृषि के लिए अत्यधिक उपयुक्त मानी जाती है।
4. उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों (पूर्वांचल क्षेत्र) में पाई जाने वाली 'लवण प्रभावित' या उसर/रेह मृदा में सोडियम कार्बोनेट और सोडियम क्लोराइड की अधिकता के कारण कृषि उत्पादकता शून्य होती है, और इसे सुधारने के लिए जिप्सम का प्रयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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