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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की किस अवस्था या चरण में बालक यह मानता है कि नियमों का पालन इसलिए किया जाना चाहिए ताकि समाज में व्यवस्था बनी रहे, सामाजिक अनुबंध और अंतरात्मा की आवाज से ऊपर उठकर 'कानून एवं व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation) प्रमुख हो जाता है?
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Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में, 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Level, लगभग 10 से 13 वर्ष) के अंतर्गत दूसरी अवस्था 'कानून एवं व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation) होती है। इस चरण में व्यक्ति का यह मानना होता है कि सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नियमों और कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए, क्योंकि यदि हर कोई नियमों को तोड़ेगा तो समाज में अराजकता फैल जाएगी। यह पारंपरिक स्तर का हिस्सा है जहाँ किशोर सामाजिक नियमों और autoridad के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'किशोरावस्था और संज्ञानात्मक विकास (Adolescence and Cognitive Development) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe) और 'कॉर्पस कैलोसम' (Corpus Callosum) के बीच अमूर्त तर्क (Abstract Reasoning), परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन (Hypothetico-Deductive Reasoning) और अंत गोलार्ध समन्वय की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड एल्किंड (David Elkind) द्वारा प्रतिपादित 'किशोर अहंकेन्द्रवाद' (Adolescent Egocentrism: काल्पनिक दर्शक और व्यक्तिगत कल्पकथा) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, किशोरावस्था मनोविज्ञान (Adolescent Psychology) और विद्यार्थियों में उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक नियंत्रण, आलोचनात्मक चिंतन व तार्किक अभिव्यक्ति के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, वह स्तर जिसमें बालक के नैतिक निर्णय इस बात पर आधारित होते हैं कि समाज के नियम क्या हैं, कानून व्यवस्था बनाए रखना और सामाजिक कर्तव्यों का पालन करना कितना आवश्यक है, निम्नलिखित में से किस चरण या स्तर के अंतर्गत आता है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हिंदी भाषा एवं व्याकरण' के अंतर्गत 'शब्द विचार' और 'उत्पत्ति के आधार पर शब्दों के वर्गीकरण' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म 'तत्सम' और उसके तद्भव रूप के मिलान के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त एवं व्याकरणिक दृष्टि से सही है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम स्थानांतरण' (Transfer of Learning) के संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) और रॉबर्ट वुडवर्थ (Robert Woodworth) द्वारा प्रतिपादित 'समान तत्वों का सिद्धांत' (Theory of Identical Elements), चार्ल्स जुड (Charles Judd) द्वारा प्रतिपादित 'सामान्यीकरण का सिद्धांत' (Theory of Generalization), तथा विलियम बैगले (William Bagley) द्वारा प्रतिपादित 'सामान्य और विशिष्ट उद्देश्यों का सिद्धांत' के वैज्ञानिक स्वरूप तथा 'द्विपक्षीय स्थानांतरण' (Bilateral Transfer) के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) की विभिन्न अवस्थाओं और प्रमुख प्रज्ञात्मक विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिसके कारण वे यह भली-भांति समझ लेते हैं कि किसी वस्तु के आकार, रूप या बर्तन बदलने से उसकी मात्रा या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत (Classification) करना, क्रमबद्ध (Seriation) करना और उत्क्रमणीयता (Reversibility) के गुणों को सीख जाता है, लेकिन वह अमूर्त विचारों और काल्पनिक समस्याओं पर तार्किक चिंतन करने में असमर्थ रहता है।
3. 'औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष और उससे आगे) के दौरान किशोरों में 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन' (Hypothetico-deductive Reasoning) की क्षमता विकसित होती है, जिससे वे अमूर्त रूप से सोचने और विभिन्न संभावनाओं के आधार पर समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान ढूंढने में सक्षम हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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