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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'कारक' (Case) प्रकरण के संदर्भ में, 'अपादान कारक' (Abladhan Karak) और 'करण कारक' (Karan Karak) दोनों में 'से' विभक्ति चिह्न का प्रयोग होता है, किंतु दोनों के अर्थ और प्रयोग में मूल अंतर होता है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. करण कारक में 'से' विभक्ति चिह्न साधन (Instrument) या माध्यम का बोध कराती है, जिसके द्वारा कोई क्रिया संपन्न होती है (जैसे- 'वह कलम से लिखता है')। 2. अपादान कारक में 'से' विभक्ति चिह्न किसी वस्तु या व्यक्ति के एक-दूसरे से अलग होने (Separation), डरने, शर्माने, तुलना करने या सीखने का बोध कराती है (जैसे- 'पेड़ से पत्ता गिरा')। 3. 'हिमालय से गंगा निकलती है' इस वाक्य में गंगा का हिमालय से अलग होने का भाव होने के कारण यहाँ करण कारक का प्रयोग हुआ है, न कि अपादान कारक का। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 और 2 दोनों बिल्कुल सही हैं। करण कारक में 'से' साधन का बोध कराता है, जबकि अपादान कारक में 'से' अलगाव, तुलना, डर या उद्गम का बोध कराता है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'हिमालय से गंगा निकलती है' वाक्य में गंगा का हिमालय से अलग होने का बोध होता है, इसलिए यहाँ 'अपादान कारक' होगा न कि 'करण कारक'। अत: केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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