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हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के अंतर्गत 'कार्सक' (कारक - Case) तथा 'सर्वनाम' के प्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिंदी व्याकरण में कारकों की कुल संख्या आठ मानी जाती है, जहाँ 'अधिकरण कारक' का विभक्ति चिह्न 'में, पर' होता है और यह क्रिया के होने के स्थान, समय या अवसर का बोध कराता है। 2. 'संप्रदान कारक' और 'कर्म कारक' दोनों की विभक्तियाँ एक ही जैसी ('को') होती हैं, किंतु दोनों में अंतर यह है कि कर्म कारक में क्रिया का सीधा प्रभाव कर्म पर पड़ता है (जहाँ 'को' वैकल्पिक या प्रत्यक्ष होता है), जबकि संप्रदान कारक में 'को' का प्रयोग 'के लिए' के अर्थ में किसी को कुछ देने या किसी के वास्ते कुछ करने के भाव में होता है। 3. हिंदी में सर्वनाम के कुल छह भेद होते हैं—पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक और निजवाचक, जहाँ 'आप' शब्द का प्रयोग केवल मध्यम पुरुष आदरसूचक सर्वनाम के रूप में ही किया जाता है और इसका प्रयोग निजवाचक के रूप में संभव नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि हिंदी व्याकरण में कारकों की संख्या आठ (कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण, संबोधन) है। अधिकरण कारक का विभक्ति चिह्न 'में, पर' है जो स्थान या समय का बोध कराता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि कर्म कारक और संप्रदान कारक दोनों में 'को' विभक्ति का प्रयोग होता है, किंतु संप्रदान में देने या उपकार का भाव ('के लिए') निहित होता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि 'आप' शब्द का प्रयोग मध्यम पुरुष (आदरसूचक) के साथ-साथ 'निजवाचक सर्वनाम' (जैसे- 'मैं यह काम अपने आप कर लूँगा') के रूप में भी किया जाता है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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