त्वरित लिंक्स
UPTET
2 views
पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'पारिस्थितिकीय पिरैमिड' (Ecological Pyramids) और उनके विभिन्न प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चार्ल्स एल्टन (Charles Elton) द्वारा प्रतिपादित पारिस्थितिकीय पिरैमिडों में 'संख्या का पिरैमिड' (Pyramid of Numbers) घास के मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र में हमेशा सीधा होता है, क्योंकि इसमें उत्पादकों (घास) की संख्या सबसे अधिक होती है और उच्च पोषण स्तर की ओर बढ़ने पर जीवों की संख्या घटती जाती है।
- 2. एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र (Tree Ecosystem) में 'संख्या का पिरैमिड' उलटा (Inverted) बनता है, क्योंकि यहाँ एक ही बड़े वृक्ष (उत्पादक) पर आश्रित शाकाहारी पक्षियों की संख्या अधिक होती है और उन पर पलने वाले परजीवियों की संख्या उससे भी अधिक होती है।
- 3. जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) में 'बायोमास का पिरैमिड' (Pyramid of Biomass) हमेशा सीधा बनता है, क्योंकि फाइटोप्लांकटन (पादपप्लवक) का कुल जीवभार (Biomass) जलीय जीवों (जैसे मछलियों) की तुलना में बहुत अधिक होता है और यह जलीय खाद्य श्रृंखला का आधार बनता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: घास के मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र में संख्या का पिरैमिड हमेशा सीधा होता है क्योंकि इसमें उत्पादक (घास) सबसे नीचे और संख्या में सर्वाधिक होते हैं, तथा शीर्ष उपभोक्ताओं की ओर जाने पर संख्या कम होती जाती है। कथन 2 सही है: एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र में संख्या का पिरैमिड उलटा (Inverted) होता है, क्योंकि 1 वृक्ष (उत्पादक) -> कई पक्षी (शाकाहारी/प्राथमिक उपभोक्ता) -> अनेक परजीवी (द्वितीयक उपभोक्ता), इस प्रकार नीचे से ऊपर जाने पर संख्या बढ़ती जाती है। कथन 3 गलत है: जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में बायोमास का पिरैमिड हमेशा 'उलटा' (Inverted) बनता है, न कि सीधा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पादपप्लवक (Phytoplankton) का जीवनकाल बहुत छोटा और उनका बायोमास कम होता है, जबकि उनपर निर्भर रहने वाली मछलियों का कुल बायोमास उनसे अधिक होता है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षण' (Inclusive Education) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'अधिगम अक्षमता - डिसग्राफिया' (Dysgraphia) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'बाएँ हेमिस्फेयर के सुपीरियर पैरिएटल लोब' (Superior Parietal Lobe), 'इन्फीरियर फ्रंटल गाइरस' (Inferior Frontal Gyrus - Broca's area), और 'सेरिबैलम' (Cerebellum) के बीच visuomotor integration deficits, fine motor coordination disruption, और graphemic motor planning failures की सक्रियण गतिकी, तथा वर्जीनिया बर्बर (Virginia Berninger) के 'ऑर्थोग्राफिक-मोटर इंटीग्रेशन मॉडल' (Orthographic-Motor Integration Model) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिसग्राफिया ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Dysgraphia Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी लेखन हस्तक्षेप (Multisensory Writing Intervention), कीनेस्थेटिक अनुकूली रणनीतियों व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के त्रि-स्तरीय मॉडल' (Three-Stratum Theory of Intelligence) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जॉन बी. कैरोल (John B. Carroll) द्वारा प्रतिपादित 'पदानुक्रमित बुद्धि मॉडल' (Stratum I: संकीर्ण क्षमताएं, Stratum II: व्यापक संज्ञानात्मक क्षमताएं जैसे द्रव व क्रिस्टलाइज्ड बुद्धि, Stratum III: सामान्य बुद्धि 'g') के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'फ्रंटोपैराइटल नेटवर्क' (Frontoparietal Network), 'व्हाइट मैटर माइलिन शीथ दक्षता' (White Matter Myelin Sheath Efficiency), और 'टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' के बीच पदानुक्रमित सूचना प्रसंस्करण, तंत्रिका संचरण वेग (Neural Conduction Velocity), और कार्यकारी नियंत्रण की सक्रियण गतिकी, तथा रेमंड कैटल (Raymond Cattell) एवं जॉन हॉर्न (John Horn) के 'द्रव और क्रिस्टलाइज्ड बुद्धि' (Fluid and Crystallized Intelligence) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-स्ट्रैटम ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Stratum Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहु-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, अमूर्त समस्या-समाधान व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के क्षेत्र सिद्धांत' और 'सृजनात्मकता' के संयुक्त न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, एडवर्ड डी बोनो (Edward de Bono) द्वारा प्रतिपादित 'पार्श्व चिंतन' (Lateral Thinking: वैकल्पिक दृष्टिकोण और अपरंपरागत विचार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'राइट हेमिस्फेयर सुपीरियर फ्रंटल गाइरस' (Right Hemisphere Superior Frontal Gyrus - उपन्यास विचार जनरेशन), 'लेटरल पोलर प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Lateral Polar Prefrontal Cortex - संज्ञानात्मक खोज और अनिश्चितता प्रबंधन), और 'टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' (TPJ - सामाजिक और वैचारिक परिप्रेक्ष्य परिवर्तन) के बीच संज्ञानात्मक लचीलेपन, पुराने तंत्रिका मार्गों के निषेध (Inhibition of Established Pathways), और नवीन सिनेप्टिक पैटर्न निर्माण की सक्रियण गतिकी, तथा गॉर्डन के 'साइनेक्टिक्स मॉडल' (Synectics Model of Creativity) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-लैटरल थिंकिंग ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Lateral Thinking Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुआयामी समस्या-समाधान, अभिनव सृजन क्षमता व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'वैशेषिक दर्शन' और उसके प्रणेता महर्षि कणाद द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद (उलूक) हैं, और यह एक भौतिकवादी एवं pluralistic (बहुवादी) दर्शन है जो इस ब्रह्मांड की रचना 'परमाणुवाद' (Atomic Theory) के सिद्धांत पर आधारित मानता है।
2. इस दर्शन के अनुसार, संपूर्ण भौतिक जगत अदृश्य और अविभाज्य 'परमाणुओं' से मिलकर बना है, और पृथ्वी, जल, तेज (अग्नि) तथा वायु- इन चार द्रव्यों के परमाणु नित्य होते हैं, जबकि आकाश को परमाणु नहीं बल्कि एक अमूर्त विभु द्रव्य माना गया है।
3. वैशेषिक दर्शन न्याय दर्शन के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है (इसे न्याय-वैशेषिक युग्म भी कहा जाता है), और यह मोक्ष प्राप्ति के लिए 'पदार्थों के तत्वज्ञान' (षड्धर्मों या छह श्रेणियों- द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष और समवाय का ज्ञान) को आवश्यक मानता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) तथा 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles)—की वैज्ञानिक एवं तार्किक विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.